Kedarnaath Yatra: फिर रोकी गई केदारनाथ यात्रा, तेज बारिश और मलबे ने भक्तों को किया निराश!

चंडीगढ़, 4 जुलाई: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से एक बार फिर बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। खराब मौसम और तेज बारिश के चलते केदारनाथ धाम की यात्रा को फिर से अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। यात्रा मार्ग पर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं इस हद तक बढ़ गईं कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।

सोनप्रयाग से आगे मुनकटिया क्षेत्र में भारी भूस्खलन हुआ, जिससे पूरी सड़क मलबे और चट्टानों से ढक गई। यही वह मार्ग है जिससे होकर हज़ारों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए प्रतिदिन आगे बढ़ते हैं। ऐसे में रास्ता बंद होने से न केवल यात्रियों की सुरक्षा संकट में पड़ गई, बल्कि उनकी आस्था और भावनाएं भी गहराई से आहत हुई हैं

40 श्रद्धालु फंसे, SDRF ने बचाया

राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और रुद्रप्रयाग पुलिस की टीमों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया। जानकारी के मुताबिक, करीब 40 श्रद्धालु मलबे के दूसरी ओर फंसे हुए थे, जो केदारनाथ से लौट रहे थे। ये सभी यात्री समय पर अलर्ट नहीं मिल पाने की वजह से भूस्खलन क्षेत्र में फंस गए थे।

हालांकि राहत की बात यह रही कि SDRF की तत्परता और साहसिक कार्रवाई के चलते सभी तीर्थयात्रियों को सुरक्षित रूप से सोनप्रयाग पहुंचा दिया गया। लेकिन घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि मानसून के समय उत्तराखंड की पहाड़ियों में यात्रा करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।

भूस्खलन कब और कैसे हुआ?

जानकारी के अनुसार, भूस्खलन की यह घटना बीती रात हुई, जब पूरे क्षेत्र में लगातार तेज बारिश हो रही थी। बारिश की वजह से मुनकटिया क्षेत्र की ढलानों से चट्टानों और मलबे का एक बड़ा हिस्सा अचानक नीचे आ गिरा, जिससे पूरी सड़क अवरुद्ध हो गई।

रात के अंधेरे में हुए इस हादसे ने प्रशासन की मुसीबतें बढ़ा दीं, क्योंकि तब तक बड़ी संख्या में यात्री या तो मार्ग में थे या विश्राम स्थलों पर रुके हुए थे।

प्रशासन का फैसला: यात्रा पर रोक

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया। राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट कहा गया कि जब तक मार्ग पूरी तरह से साफ और सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक श्रद्धालुओं की आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी।

हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से यात्रा दोबारा कब शुरू होगी – इस बारे में कोई स्पष्ट समय सीमा नहीं दी गई है।

यात्रा रोकने से आहत हुए श्रद्धालु

भक्तों में इस निर्णय को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। एक ओर, वे अपनी सुरक्षा को लेकर प्रशासन के फैसले को समझते हैं, वहीं दूसरी ओर बाबा केदार के दर्शन न कर पाने का गहरा दुख और उदासी उनके चेहरों पर साफ देखी गई।

कुछ श्रद्धालुओं ने कहा, “हम महीनों से तैयारी कर रहे थे, लेकिन मौसम ने हमें रोक दिया। शायद बाबा की यही इच्छा थी।”

केवल केदारनाथ नहीं, यमुनोत्री मार्ग भी बंद

उत्तराखंड में सिर्फ केदारनाथ ही नहीं, बल्कि यमुनोत्री यात्रा मार्ग भी भूस्खलन और बादल फटने के कारण पूरी तरह बाधित है। सिलाई बैंड क्षेत्र के पास चार दिन पहले बादल फटा था, जिसके बाद से अब तक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद है।

इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और सात लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

254 तीर्थयात्रियों को पैदल रास्ते से निकाला गया

राहत की बात यह है कि एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और बचाव दल के संयुक्त प्रयासों से यमुनोत्री और उत्तरकाशी के बीच पैदल फंसे हुए 254 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। ये सभी तीर्थयात्री स्याना चट्टी और जानकी चट्टी के बीच भूस्खलन में फंसे थे।

हालांकि स्लाइड ज़ोन से होकर गुजरने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन यह रास्ता अब भी बेहद जोखिमपूर्ण बना हुआ है।

अब आगे क्या? मौसम और व्यवस्था पर निर्भर

राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि यात्रा मार्गों को पूरी तरह से सुरक्षित और स्थिर बनाए बिना कोई भी तीर्थयात्री आगे नहीं बढ़ सकेगा। साथ ही मौसम विभाग से लगातार अपडेट लिए जा रहे हैं, ताकि किसी नए खतरे की पूर्व सूचना दी जा सके।