चंडीगढ़, 10 जुलाई: कर्नाटक के हसन जिले से हाल ही में जो खबरें सामने आई हैं, उन्होंने पूरे राज्य को चिंता में डाल दिया है। बीते 40 दिनों में 23 लोगों की मौत हार्ट अटैक से हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई मृतक 19 से 45 वर्ष की उम्र के थे — यानी युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोग।
इन असामयिक और अचानक हुई मौतों ने लोगों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारी जीवनशैली अब इतनी अस्वस्थ हो चुकी है कि दिल की बीमारियाँ युवाओं को भी नहीं बख्श रही हैं?
अस्पतालों में बढ़ी जांच की भीड़
इस खबर के बाद मैसूरु स्थित जयदेव हार्ट इंस्टीट्यूट और बेंगलुरु में मौजूद इसकी मुख्य शाखा में कार्डियक जांच के लिए लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है।
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सुबह से ही लंबी कतारों में खड़े लोग, जिनमें युवा, बुज़ुर्ग और मध्यम वर्ग के लोग शामिल हैं, अपने दिल की जांच कराने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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जयदेव अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, रोज़ाना मरीजों की संख्या में 8% तक का इज़ाफा हुआ है, जो कि सामान्य से बहुत अधिक है।
डॉक्टरों की अपील: दहशत नहीं, जागरूकता ज़रूरी
अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. के.एस. सदानंद ने जनता से अपील की है कि:
“सिर्फ एक बार अस्पताल जाकर चेकअप कराने से समाधान नहीं मिलेगा।
जरूरी है कि लोग अपनी जीवनशैली में बदलाव करें —
नियमित व्यायाम करें
संतुलित आहार लें
तनाव कम करें
धूम्रपान और शराब से दूर रहें
और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में समय-समय पर चेकअप करवाएं।”
उन्होंने यह भी कहा कि सभी लोग अगर सिर्फ एक अस्पताल में इकठ्ठा होंगे, तो गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाएगा।
चौंकाने वाले आंकड़े: युवाओं पर भी मंडराने लगा दिल का खतरा
हसन जिले में जिन 23 लोगों की मौत हुई है:
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6 लोगों की उम्र: 19 से 25 वर्ष
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8 लोगों की उम्र: 25 से 45 वर्ष
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शेष लोग भी 60 वर्ष से कम उम्र के थे
यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग और सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।
सरकार की प्रतिक्रिया: जांच समिति गठित
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हालात को गंभीरता से लेते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता डॉ. के.एस. रविंद्रनाथ कर रहे हैं (जयदेव इंस्टीट्यूट के निदेशक)।
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समिति को निर्देश दिया गया कि वह पता लगाए कि आखिर कम उम्र में दिल का दौरा पड़ने के कारण क्या हो सकते हैं?
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समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है, जिसमें हसन को केस स्टडी के तौर पर जांचने की सिफारिश की गई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: अफवाहों से दूर रहें, ध्यान रखें स्वास्थ्य पर
विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं:
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बढ़ता तनाव और मानसिक दबाव
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अनियमित जीवनशैली और खानपान
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अत्यधिक स्क्रीन टाइम, नींद की कमी
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शारीरिक निष्क्रियता, व्यायाम की कमी
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या फिर पहले से मौजूद लेकिन अनजानी स्वास्थ्य स्थितियां
जब तक पुख्ता वैज्ञानिक कारण सामने न आएं, तब तक किसी भी अफवाह या डर की लहर में बहना खतरनाक हो सकता है।
क्या करें आप? दिल को रखें सुरक्षित
नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल की जांच करवाएं
हर दिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या हल्का व्यायाम करें
जंक फूड से बचें, फल और सब्जियां आहार में शामिल करें
धूम्रपान/शराब से पूरी तरह बचें
तनाव से बचने के लिए योग, ध्यान, या मनपसंद गतिविधियों में समय दें
और सबसे जरूरी — घबराएं नहीं, लेकिन जागरूक जरूर बनें
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