जयपुर-अजमेर हाईवे पर तबाही का मंजर: केमिकल टैंकर बना आग का गोला, ड्राइवर की जलकर मौ*त!

चंडीगढ़, 25 जून: राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास बुधवार सुबह का वक्त उस समय दहशत और अफरातफरी में बदल गया, जब जयपुर-अजमेर नेशनल हाईवे-48 पर एक केमिकल टैंकर भीषण आग की चपेट में आ गया। यह दुर्घटना मोखमपुरा कस्बे के पास सुबह करीब 8:30 बजे हुई, जिसमें टैंकर ड्राइवर राजेंद्र की मौके पर ही जलकर मौत हो गई।

हादसे का दृश्य इतना भयावह था कि हाईवे पर वाहनों की कतारें लग गईं और कई लोग अपनी गाड़ियां सड़क पर ही छोड़कर खेतों की ओर भाग निकले। सड़क पर एक ओर लपटों का भयानक नजारा था, वहीं दूसरी ओर लोग जान बचाने को इधर-उधर दौड़ते नजर आए।

कैसे हुआ हादसा?

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टैंकर में मेथेनॉल भरा हुआ था। किसी कारणवश टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे केमिकल हाईवे पर फैल गया। कुछ ही पलों में टैंकर में जोरदार धमाका हुआ और वह आग के गोले में तब्दील हो गया। आग और धुएं की लपटें इतनी भयंकर थीं कि यह दृश्य लगभग 300 मीटर दूर से भी साफ नजर आ रहा था।

इस हादसे में टैंकर का ड्राइवर राजेंद्र बाहर नहीं निकल सका और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। चश्मदीदों का कहना है कि धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

डर के मारे खेतों की ओर भागे लोग

विशाल, जो जयपुर की ओर जा रहे थे, ने बताया,

“हमारे आगे एक बड़ा टैंकर चल रहा था। अचानक उसमें धमाका हुआ और तुरंत आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। लोगों ने अपनी गाड़ियां छोड़ दीं और जान बचाने के लिए खुले मैदान या खेतों की ओर भागने लगे।”

गनीमत रही कि इस भीषण हादसे में और किसी की जान नहीं गई। हालाँकि, यह हादसा बताता है कि हाईवे पर यात्रा कर रहे लोगों की जान हमेशा सुरक्षित नहीं होती, खासकर जब ऐसे संवेदनशील केमिकल टैंकर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के चलाए जाते हैं।

हाईवे पर लगा लंबा जाम, एक लेन से डायवर्ट हुआ ट्रैफिक

हादसे के कुछ ही समय बाद मोखमपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने फायर ब्रिगेड की मदद से राहत और बचाव कार्य शुरू किया। आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिससे सैकड़ों वाहन फंस गए। बाद में ट्रैफिक को एक लेन से डायवर्ट कर थोड़ी राहत दी गई, लेकिन हादसे के चलते NH-48 करीब 30 मिनट तक पूरी तरह बाधित रहा।

क्या प्रशासन ने पिछली घटनाओं से कुछ सीखा है?

यह हादसा ऐसे वक्त में हुआ है, जब इसी हाईवे पर दिसंबर 2024 में एक LPG टैंकर ब्लास्ट में 20 लोगों की मौत और 35 से ज्यादा के झुलसने की घटना ने पूरे राज्य को हिला दिया था। उस समय सरकार और परिवहन विभाग की ओर से कई दावे किए गए थे — जैसे कि टैंकरों की नियमित मॉनिटरिंग, रूट फिक्सिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल।

लेकिन ताजा घटना बताती है कि उन दावों पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद भी केमिकल और गैस टैंकरों की आवाजाही पर न तो कोई सतर्क निगरानी होती है और न ही ड्राइवरों को आपातकालीन हालात से निपटने की उचित ट्रेनिंग दी जाती है।

अब उठते हैं गंभीर सवाल

राज्य सरकार और संबंधित विभागों के लिए यह हादसा एक गंभीर चेतावनी है। अब ये सवाल ज़रूरी हो गए हैं:

🔸 केमिकल से भरे टैंकरों की सुरक्षा और संचालन की जिम्मेदारी किसकी है?
🔸 क्या हाईवे पर चल रहे खतरनाक टैंकरों की निगरानी के लिए कोई आधुनिक प्रणाली लगाई गई है?
🔸 ड्राइवरों को आपात स्थिति से निपटने के लिए क्यों नहीं प्रशिक्षित किया जाता?
🔸 हर हादसे के बाद सिर्फ बयान और आश्वासन क्यों मिलते हैं, ठोस कदम क्यों नहीं उठते?

जरूरत है स्थायी समाधान की, न कि हादसों के बाद कार्रवाई की

राजस्थान जैसे राज्य, जहां हर दिन हजारों भारी वाहन और टैंकर नेशनल हाईवे पर दौड़ते हैं, वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम अनिवार्य हैं। सिर्फ रजिस्ट्रेशन नंबर और रूट पर नजर रखना काफी नहीं, बल्कि रियल-टाइम ट्रैकिंग, ड्राइवर ट्रेनिंग, और आपातकालीन प्रबंधन इकाइयों की तैनाती जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी हैं।

यदि अब भी प्रशासन नींद से नहीं जागा, तो अगली दुर्घटना कहीं और, और शायद और भी ज्यादा भयावह हो सकती है।