चंडीगढ़, 4 जुलाई: बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को 200 करोड़ रुपये के बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अभिनेत्री की वह याचिका, जिसमें उन्होंने खुद के खिलाफ दर्ज एफआईआर और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दाखिल दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट को रद्द करने की मांग की थी, 4 जुलाई को अदालत द्वारा खारिज कर दी गई।
यह फैसला हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने सुनाया। इस आदेश के साथ ही जैकलीन की कानूनी राह और अधिक कठिन होती दिख रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2021 में प्रकाश में आया, जब दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद एक कथित हाई-प्रोफाइल ठग सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और दिल्ली पुलिस की जांच शुरू हुई।
**सुकेश पर आरोप है कि उसने जून 2020 से मई 2021 के बीच रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों – शिविंदर सिंह और मलविंदर सिंह – की पत्नियों से कथित तौर पर करीब ₹200 करोड़ रुपये की ठगी की। इस रकम को हवाला, शेल कंपनियों और फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए अलग-अलग ठिकानों पर भेजा गया।
ED की चार्जशीट के अनुसार, इस रकम का एक बड़ा हिस्सा महंगे तोहफे, लक्जरी गाड़ियाँ और विदेशी यात्राओं पर खर्च किया गया, जिसमें जैकलीन फर्नांडिस को दिए गए उपहार भी शामिल हैं।
जैकलीन का नाम क्यों आया सामने?
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह बात सामने आई कि सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन को करीब ₹10 करोड़ रुपये मूल्य के उपहार दिए थे। इनमें हीरे के गहने, लग्जरी बैग्स, घोड़े, पालतू बिल्लियाँ, और महंगे डिजाइनर कपड़े शामिल थे।
ED का कहना है कि ये उपहार “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” यानी अवैध रूप से प्राप्त धन से खरीदे गए थे, इसीलिए जैकलीन की भूमिका को भी संदेह के घेरे में रखा गया। यही कारण है कि उन्हें न केवल पूछताछ के लिए बुलाया गया, बल्कि चार्जशीट में सह-आरोपी के रूप में शामिल किया गया।
जैकलीन की याचिका में क्या कहा गया था?
जैकलीन ने अपनी याचिका में खुद को निर्दोष बताते हुए कोर्ट से आग्रह किया कि उनके खिलाफ दर्ज FIR और ED की चार्जशीट को अमान्य घोषित किया जाए।
उनका तर्क था:
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वह सुकेश की पृष्ठभूमि और उसकी आपराधिक गतिविधियों से पूरी तरह अनभिज्ञ थीं।
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वह खुद एक धोखाधड़ी की शिकार हैं और इस पूरे मामले में उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है।
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ED के पास उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है, सिर्फ परिस्थितिजन्य प्रमाण हैं।
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दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल पहली रिपोर्ट में उन्हें प्रॉसिक्यूशन गवाह के तौर पर दिखाया गया था, इसलिए उनके खिलाफ चार्जशीट अवैध है।
ED की दलीलें और कोर्ट का जवाब
ED ने कोर्ट में जोरदार तर्क रखते हुए कहा कि:
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विशेष अदालत पहले ही चार्जशीट का संज्ञान ले चुकी है।
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जैकलीन ने उस समय उस आदेश को चुनौती नहीं दी, इसलिए अब एफआईआर और चार्जशीट को खारिज करने की मांग प्रक्रियागत रूप से सही नहीं है।
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जांच में जैकलीन की भूमिका को लेकर पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं और यह मामला सिर्फ उपहार प्राप्त करने तक सीमित नहीं, बल्कि धन की उत्पत्ति, इरादा और संबंधों की गहराई की ओर भी संकेत करता है।
इन दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि:
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यह मामला बेहद गंभीर प्रकृति का है।
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याचिका में कोई ऐसा कानूनी आधार नहीं है जिससे एफआईआर या चार्जशीट को निरस्त किया जा सके।
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ट्रायल कोर्ट ही इस मामले की विस्तृत जांच और सुनवाई का उचित मंच है।
अब जैकलीन के लिए आगे क्या?
इस आदेश के बाद जैकलीन फर्नांडिस की कानूनी परेशानियाँ और गहराती नजर आ रही हैं।
अब उनके पास निम्नलिखित विकल्प बचे हैं:
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वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकती हैं।
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ट्रायल कोर्ट में जमानत की शर्तों में ढील या डिस्चार्ज एप्लिकेशन दाखिल कर सकती हैं।
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यदि मामला ट्रायल तक जाता है, तो उन्हें अदालत में अपना पक्ष मजबूत साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करना होगा।
सुकेश चंद्रशेखर – मनी लॉन्ड्रिंग का मास्टरमाइंड?
सुकेश की पहचान एक पेशेवर ठग और धोखेबाज़ के रूप में हुई है। वह पहले भी कई वित्तीय अपराधों में संलिप्त रह चुका है। इस बार वह जेल में रहते हुए ही पूरे फ्रॉड को अंजाम दे रहा था।
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उसने फर्जी कॉल्स और पहचान का उपयोग कर VIP लोगों को प्रभावित किया।
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हवाला के माध्यम से धन की हेराफेरी की।
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फर्जी कंपनियों के माध्यम से मनी ट्रांसफर किया।
इस मामले में सुकेश के अलावा उसकी पत्नी लीना पॉलोज, और कई अन्य लोग भी आरोपी बनाए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने इस पर मकोका (MCOCA) की धाराएं भी लगाई हैं, जो संगठित अपराध के मामलों में लगती हैं।
ईडी की अब तक की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में अब तक:
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₹7.1 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त की हैं।
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और भी संपत्तियों की ट्रैकिंग और जब्ती की प्रक्रिया जारी है।
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कई बॉलीवुड हस्तियों को पूछताछ के लिए तलब किया गया है।
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