चंडीगढ़, 16 मई: भारत की अंतरिक्ष शक्ति में एक और ऐतिहासिक पन्ना जुड़ने जा रहा है। 18 मई 2025 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपना 101वां उपग्रह RISAT-18 अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर चुका है। यह उपग्रह भारत की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, निगरानी और रिमोट सेंसिंग क्षमताओं को एक नई ऊंचाई देगा।
इस लॉन्च के जरिए भारत न सिर्फ तकनीकी दृष्टि से एक नई छलांग लगाने जा रहा है, बल्कि यह मिशन देश की सामरिक और रणनीतिक शक्ति को भी मजबूत करेगा।
क्या है RISAT-18 और क्यों है यह खास?
RISAT-18 (Radar Imaging Satellite-18) एक Earth Observation Satellite (पृथ्वी अवलोकन उपग्रह) है, जिसे खासतौर पर देश की सीमाओं की निगरानी, आपदा के समय त्वरित सहायता, और कृषि व मौसम निगरानी जैसे अहम कामों के लिए डिजाइन किया गया है।
इस सैटेलाइट की मदद से:
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सीमाओं पर किसी भी हलचल पर नजर रखना आसान होगा।
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प्राकृतिक आपदा (बाढ़, भूकंप, चक्रवात) के समय तेज़ी से निर्णय लिए जा सकेंगे।
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कृषि से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से अमल में लाया जा सकेगा।
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मौसम विज्ञान में और ज्यादा सटीकता हासिल की जा सकेगी।
कहां से और कैसे होगा लॉन्च?
RISAT-18 को प्रक्षेपित किया जाएगा भारत के प्रमुख लॉन्चपैड श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से। यह लॉन्च PSLV-C61 रॉकेट (Polar Satellite Launch Vehicle) के माध्यम से किया जाएगा, जो ISRO का बेहद भरोसेमंद और सफल रॉकेट है।
ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने जानकारी दी कि यह मिशन संगठन की तकनीकी निरंतरता और सफलता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी साल जनवरी में ISRO ने अपना 100वां रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया था, और अब यह 101वीं उड़ान भारत की अंतरिक्ष कहानी को और गौरवशाली बनाने जा रही है।
देश की सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती में इसरो की भूमिका
ISRO अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर खास जोर दिया कि इसरो के सभी अंतरिक्ष मिशन देश की आंतरिक सुरक्षा, विकास और मानवीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाए जाते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत किसी देश से प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहा, बल्कि अपनी राष्ट्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा:
“हमारा उद्देश्य मुकाबला नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता है। हर मिशन भारतीय नागरिकों के हित और देश की मजबूती को केंद्र में रखकर तैयार किया जाता है।”
भारत की अंतरिक्ष यात्रा: 1979 से अब तक
भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत 1979 में SLV-3 रॉकेट के साथ हुई थी। पहला सफल उपग्रह प्रक्षेपण 1980 में किया गया था, और तब से लेकर आज तक ISRO ने अपनी तकनीकी क्षमता में निरंतर प्रगति की है।
आज इसरो:
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रक्षा क्षेत्र में निगरानी और कम्युनिकेशन सुनिश्चित करता है।
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मौसम पूर्वानुमान और कृषि संबंधित जानकारी देता है।
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आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाता है।
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वैश्विक स्तर पर भी सैटेलाइट लॉन्च सेवाएं देता है।
अगला लक्ष्य: EOS-09 (RISAT-1B) का प्रक्षेपण जून में
ISRO ने अपने अगले मिशन की भी जानकारी साझा की है। इसका नाम है EOS-09, जिसे RISAT-1B भी कहा जाता है। इसे 18 जून 2025 को श्रीहरिकोटा से ही लॉन्च किया जाएगा। यह उपग्रह भी भारत के पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम में एक और रणनीतिक कड़ी साबित होगा।
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