चंडीगढ़, 9 जुलाई: पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालातों के बीच ईरान ने आखिरकार इजराइल के साथ हुए हालिया युद्ध में अपने नुकसान की व्यापकता को स्वीकार कर लिया है। ईरानी सरकार की ओर से जारी नए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक कम से कम 1,060 लोग मारे जा चुके हैं। युद्धविराम लागू होने के बाद यह पहला मौका है जब ईरान ने इतनी स्पष्टता से अपने हताहतों का ब्यौरा सार्वजनिक किया है।
आधिकारिक बयान में दी गई चेतावनी: संख्या और बढ़ सकती है
ईरान के ‘फाउंडेशन ऑफ मार्टर एंड वेटरंस अफेयर्स’ के प्रमुख सईद ओहादी ने यह जानकारी एक सरकारी टेलीविजन साक्षात्कार में दी। उन्होंने बताया कि जिन लोगों की हालत गंभीर है, उन्हें देखते हुए यह आंकड़ा 1,100 या उससे ज्यादा तक जा सकता है।
यह पहली बार है जब ईरान ने इजराइली हमलों के असर को लेकर इतनी स्पष्ट स्वीकारोक्ति दी है, जबकि पहले तक वह विनाश की वास्तविक तस्वीर को कम करके दिखा रहा था।
इजराइली हमलों से वायु रक्षा प्रणाली ध्वस्त
इजराइल द्वारा चलाए गए लगातार 12 दिनों के बमबारी अभियान ने ईरान की एयर डिफेंस (वायु रक्षा प्रणाली) को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है।
हालांकि, ईरान की सेना ने अब तक यह खुलासा नहीं किया है कि सैन्य स्तर पर कितनी क्षति हुई है — कितनी सैन्य इकाइयां, हथियार प्रणालियाँ या बेस तबाह हुए हैं, इसकी जानकारी फिलहाल अधूरी है।
मानवाधिकार संगठनों का दावा: असल आंकड़ा और अधिक
वाशिंगटन स्थित एक मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, युद्ध में मारे गए लोगों की असली संख्या ईरान के दावे से भी अधिक हो सकती है। उनकी रिपोर्ट के अनुसार:
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436 नागरिकों की मौत हुई है
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435 सुरक्षाबलों के जवान मारे गए हैं
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कुल मिलाकर 1,190 मौतों की पुष्टि की गई है
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साथ ही करीब 4,475 लोग घायल हुए हैं
इस रिपोर्ट से यह साफ होता है कि जमीनी हालात कहीं ज्यादा गंभीर हैं और ईरान पर युद्ध का प्रभाव बहुत व्यापक है।
युद्धविराम के बाद भी उभरा दर्द, धीरे-धीरे सामने आ रही है सच्चाई
इजराइल और ईरान के बीच भले ही अब युद्धविराम लागू हो चुका है, लेकिन युद्ध की पीड़ा और बर्बादी अब धीरे-धीरे सार्वजनिक हो रही है। ईरान सरकार पर लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि वह आंतरिक क्षति को छिपाता है। लेकिन इस बार लगातार अंतरराष्ट्रीय दबाव, मीडिया रिपोर्ट्स और मानवाधिकार संगठनों के खुलासों के चलते सरकार को सच्चाई स्वीकार करनी पड़ी।
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