19 नवंबर को मनाया जाता है International Men’s Day

आज यानी 19 नवंबर को हर साल अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता हैं। पुरुष हमारे जीवन में एक महत्तपूर्व भूमिका निभाते हैं. कभी पिता बनकर, कभी भाई बनकर तो कभी दोस्त बनकर वो सभी को संभालते हैं, और अपनी जिम्मेदारीयों को निभाते है। 19 नवंबर का ये दिन पुरुषों के सम्मान, योगदान, मेहनत और संघर्ष को याद दिलाता है. ये दिन हमे याद दिलाता है कि पुरुष सिर्फ मजबूत दिखते हैं, लेकिन हर पुरुष के अंदर भी भावनाएं और उम्मीदें होती है। पुरुषों के लिए यह सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक मौका है खुद को समझने, अपनी जिंदगी को नए नजरिये से देखने और अपने अंदर छिपी ताकत को पहचानने का. अक्सर देखा जाता है कि पुरुष अपनी भावनाओं को खुलकर नहीं बताते,

 

पहली बार साल 1999 में अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस सेलिब्रेट किया गया. वेस्टइंडीज के प्रोफेसर डॉ. जेरोम टीलक्सिंग ने इसको मनाने का सबसे पहले विचार रखा था । वह अपने पिता के जीवन से बड़े प्रेरित थे जिसके वजह से उन्होंने इसको मनाने की प्रेरणा ली।  2007 के बाद भारत में इस दिन का औपचारिक रूप से मनाया जाना तेजी से बढ़ा और आज देश के कई हिस्सों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

 

मेन्स डे मनाने का उद्देश्य

मेन्स डे को मनाने का मुख्य उद्देश्य पुरुषों के अमूल्य योगदान के प्रति सम्मान जताना, उनके मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना, पुरुषों के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालना और उनके अधिकारों और सम्मान के बारे में जागरूकता बढ़ाना है. अक्सर पुरुष अपने मन की बातें साझा नहीं करते, इसलिए यह दिन उन्हें समझने और उनका मनोबल बढ़ाने का मौका देता है.

 

“मर्द दर्द नहीं दिखाते” का विचार

समाज ने पुरुषों के लिए कई नियम बना रखें हैं, जो कही ना कही उनके जीवन को बेहतर नही बनाते । बचपन से ही कई पुरुषों को सिखाया जाता है कि “मर्द रोते नहीं”, “मर्द दर्द नहीं दिखाते”, “मर्द इमोशनल नहीं होते”. इस तरह की बातें सुनकर पुरुष अपनी फीलिंग्स को दबाना सीख जाते हैं और यही चीज आगे चलकर मेंटल हेल्थ को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है.जो कही ना कही उनके घऱ और परिवार को बिगाड़ने में हिस्सेदार होते है। समाज के इन विचारों को दूर करके पुरुष को नई विचारधारा से जीना शुरु करना चाहिए।

एक पुरुष तभी पूरी तरह खुश रह सकता है जब वह अपनी असल पहचान को खुलेपन के साथ जी सके. इसलिए खुद से वादा करें कि आप इन पुराने नियमों को मानकर नहीं चलेंगे. घर के काम में हाथ बंटाना सीखें, वर्कप्लेस पर महिलाओं और बाकी लोगों को बराबरी का सम्मान दें,  पुरुषों को ठानना पड़ेगा कि वह यह रूढ़िवादी सोच को तोड़ेगे।