भारत-अमेरिका की ऐतिहासिक LPG डील, 2026 में 2.2 MT आयात”

अमेरिकी हाई टैरिफ के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में जो दरार देखी गई थी, वह अब धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है. US के साथ ट्रेड डील की उम्मीदों के बीच भारत ने पहली बार अमेरिका के साथ लंबे समय तक एलपीजी आयात के लिए एक बड़ी समझौता-डील की है. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका भारत पर लगाए गए पेनल्टी टैरिफ वापस लेने को तैयार है, जबकि भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार को आंशिक रूप से खोलेगा. दोनों देशों ने हाल के महीनों में बढ़ी व्यापारिक तना/तनी को कम करने पर सहमति जताई है.

 

डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने करीब 200 फूड प्रोडक्ट्स पर से टैरिफ हटाने का ऐलान किया, तो वहीं अब दोनों देशों के बीच पहली बार एलपीजी को लेकर डील फाइनल हो गई है, सरकार का कहना है कि इस तरह के समझौते से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने का अवसर भी मिलेगा.

यूएस-इंडिया की बड़ी डील

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मिडिया X पर पोस्ट करते हुए सोमवार को इसे एक ऐतिहासिक डील बताते हुए कहा कि दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती एलपीजी मार्केट- भारत ने औपचारिक रूप से अमेरिका के लिए अपना बाजार खोल दिया है.

 

उन्होंने कहा कि देश के लोगों को किफायती दाम पर एलपीजी उपलब्ध कराना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है. इसी दिशा में आपूर्ति के स्रोतों में विविधिकरण लाया जा रहा है और यह समझौता उस दिशा में एक बड़ा कदम है. इसके साथ उन्होंने बताया  अगले साल यानी 2026 में सरकारी तेल कंपनियों ने एक साल के लिए करीब 2.2 मिलियन टन एलपीजी गैस आयात पर यह समझौता किया है.

 

Social media पोस्ट में शेयर की गई जानकारी के मुताबित केंद्रीय मंत्री ने बताया है कि भारत की ऑयल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने साल 2026 में अमेरिका से 2.2 मिलियन टन प्रति वर्ष LPG Import का एक साल के एग्रीमेंट साइन किया है। उन्होंने बताया कि एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक कीमत 1100 रुपये से भी ज्यादा थी. देश की आम जनता पर एलपीजी की बढ़ती कीमतों का बोझ न पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए थे.