रविवार के दिन सूर्य उपासना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन सूर्य को जल चढ़ाने, मंत्र का जाप करने और सूर्य नमस्कार करने से बल, बुद्धि, विद्या, वैभव, तेज, ओज, पराक्रम औऱ दिव्यता आती है। सूर्य देव की आराधना के लिए सूर्योदय का समय सबसे उपयुक्त रहता है। सूर्य़ मंत्रों का जाप सुबह तांबे के पात्र से अर्घ्य देते हुए करना सबसे उत्तम है।
सूर्य देव को जल चढाते समय जल में रोली फूल अक्षत ड़ाल कर चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय सूर्य देव का प्रमुख मंत्र “ॐ सूर्याय नमः“ का जाप करना चाहिए ।
“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” यह बीज मंत्र है
“ॐ घृणि सूर्याय नमः” ऊर्जा और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं।
इन मंत्रो का जाप करना चाहिए।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि भक्त मंत्र का सटीक प्रयोग करें तो अवश्य ही मंत्रो का लाभ प्राप्त होता है. सूर्य के आरोग्य मंत्र का सही विधि से जाप करके आप रोगों से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं. यदि आप या आपके परिवार में कोई भी किसी भी प्रकार के रोग से पीड़ित है तो सूर्य के आरोग्य दायक मंत्र का जप कर सकते हैं.
ऊँ नम: सूर्याय शान्ताय सर्वरोग निवारिणे।
आयु ररोग्य मैस्वैर्यं देहि देव: जगत्पते।।
मंत्र जाप के लिए सूर्य की ओर मुख करके अपनी आंखें बंद करके सूर्य का ध्यान करें और एक गहरी-लंबी सांस लें.
अब इस तरह से भगवान सूर्य नारायण का ध्यान करें कि जैसे आपके रोम-रोम में उनका दिव्य प्रकाश प्रवेश कर रहा हो.
लगभग 10 से 15 मिनट तक भगवान सूर्य नारायण का ध्यान करें.
इसके बाद तुलसी की माला से 251 बार इस मंत्र को बिना बोले अपने मन ही मन में जाप करें.
जब मंत्र जाप पूर्ण हो जाए तो उसके बाद भगवान सूर्य को प्रणाम करके तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें थोड़ा सा दूध और शक्कर डालकर अर्घ्य दें.
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