भद्रा काल में कैसे करें होलिका दहन? जानें नियम

इस बार होलिका दहन को लेकर अलग अलग बातें की जा रही है। जिसके वजह से होलिका दहन की सही तिथि को लेकर लोग असमंजस में हैं, तो जान लें कि वर्ष 2026 में होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में और भद्रा की समाप्ति के बाद किया जाता है। लेकिन अगर भद्रा समाप्त न हो तो भद्रा के शुभ हिस्से में ही करना उचित माना जाता है। इस वर्ष भद्रा का शुभ मुहूर्त भद्रा के पुच्छ काल में पड़ रहा है जो 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और भद्रा के कारण यह संभव नहीं है। इसलिए 2 मार्च को ही पूजन कर रात्रि में विधिपूर्वक होलिका दहन करें ।

शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 02 मिनट तक

ज्योतिषाचार्य पंडित के अनुसार इस वर्ष भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 02 मिनट तक रहेगा। यह कुल 1 घंटा 12 मिनट का समय है। चूंकि पूरी रात भद्रा है, इसलिए केवल यही समय शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इसी समय विधि-विधान से दहन करने पर शुभ फल प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा प्रारंभ हो रही

शास्त्रों के अनुसार होलिका पूजन और दहन पूर्णिमा तिथि में और भद्रा रहित समय में रात्रि में किया जाता है। लेकिन इस वर्ष स्थिति विशेष है, क्योंकि पूर्णिमा तिथि के पूर्वार्द्ध में भद्रा का वास रहता है। 2 मार्च को सायंकाल 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा प्रारंभ होकर 3 मार्च की प्रातः 4 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। यानी पूरी रात भद्रा और पूर्णिमा दोनों एक साथ रहेंगे। ऐसी स्थिति में शास्त्रों में भद्रा के पुच्छ भाग में दहन करने का निर्देश दिया गया है, क्योंकि भद्रा का पुच्छ सभी कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।

3 मार्च को लगेगा चंद्र ग्रहण

पंचांग के अनुसार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण दोपहर लगभग 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा और शाम करीब 6:45 बजे तक रहेगा। हालांकि अलग-अलग स्थानों पर समय में थोड़ा अंतर हो सकता

6 बजकर 20 मिनट से सूतक लगेगा

इसलिए  3 मार्च की सुबह 6 बजकर 20 मिनट से ही सूतक प्रभावी माना जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और खाना बनाने से परहेज किया जाता है। इस समय गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के कारण लोग परंपराओं का पालन करते हैं, हालांकि वैज्ञानिक रूप से इसका सीधा असर साबित नहीं है

होलिका दहन की पूजा कैसे की जाती है?

होलिका दहन से पहले होलिका की पूजा की जाती है। इस दिन शुभ मुहुर्त में होलिका दहन के स्थल को साफ करें फिर लकड़ियों से दहन करने के लिए होलिका तैयार करें अब  रोली, चावल, हल्दी, गुड़, नारियल और फूल चढ़ाए जाते हैं फिर शुभ मुहूर्त में अग्नि जलाई जाती है। महिलाएं और पुरुष इस अग्नि की परिक्रमा करते हैं और परिवार में सुख शांति की प्रार्थना करती हैं। कई जगह जौ या गेहूं की बालियां भी सेंकी जाती हैं और इसके राख लोग घऱ ले कर आते है फिर सभी लोगो को इसे माथे पर लगाते है।