26 दिन की बारिश में हिमाचल पर टूटा कहर: 109 लोगों की मौ*त, 707 सड़कें बंद, करोड़ों का नुकसान!

चंडीगढ़, 17 जुलाई: हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून का दौर बेहद भयावह साबित हुआ है। बीते लगभग एक महीने यानी 20 जून से 16 जुलाई 2025 तक, लगातार बारिश और उससे जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य को गहरी चोट दी है। जान-माल की तबाही के आंकड़े सामने आने के बाद राज्य की स्थिति और भी चिंताजनक दिखाई देती है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 26 दिन की भारी बारिश के दौरान प्रदेश में कुल 109 लोगों की मौत हुई। इनमें से 64 लोगों की जान सीधे तौर पर बारिश से जुड़ी घटनाओं में गई—जैसे भूस्खलन, बाढ़, बिजली गिरना, बादल फटना और अन्य अप्रत्याशित प्राकृतिक घटनाएं। वहीं, 45 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में चली गई, जो बारिश के कारण बिगड़ी सड़क स्थिति का परिणाम हैं।

सड़कें, बिजली और पानी—सब कुछ अस्त-व्यस्त

17 जुलाई की सुबह राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) द्वारा जारी एक रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि हिमाचल की कई सड़कें अब भी यातायात के लिए बंद पड़ी हैं। कुल 707 सड़कें, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग 707 भी शामिल है, मुख्य रूप से भूस्खलन और भारी बारिश के कारण अवरुद्ध हैं।

इसी के साथ-साथ, 137 जलापूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को पीने के पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। 52 वितरण ट्रांसफार्मर ठप पड़ने से कई जगहों पर बिजली भी गुल है। खासकर मंडी, कांगड़ा, सिरमौर और कुल्लू जैसे जिलों में यह संकट और गंभीर रूप ले चुका है।

मंडी और कांगड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित

बारिश से होने वाली मौतों के मामले में मंडी और कांगड़ा जिले सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं। इन दोनों जिलों में 16-16 लोगों की मौत हुई है। हमीरपुर में 8, कुल्लू में 4 और चंबा में 3 लोगों की जान गई। इसके अलावा, कुल्लू और सोलन में सड़क हादसों में 7-7 मौतें, चंबा में 6, और शिमला, किन्नौर, मंडी और कांगड़ा जिलों में भी कई अन्य जानें गईं।

भारी आर्थिक नुकसान, मवेशियों की भी जान गई

प्राकृतिक आपदाओं की वजह से सिर्फ जान ही नहीं गई, बल्कि राज्य को कुल 883 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान भी हुआ है। इसमें सरकारी संपत्तियों के साथ-साथ निजी संपत्ति, सड़कें, पुल, पेयजल परियोजनाएं और बिजली ढांचा भी शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, 1,228 मवेशी और 21,500 से अधिक मुर्गी-पक्षी भी इस विनाशकारी बारिश की भेंट चढ़ गए। यह आंकड़ा बताता है कि कैसे प्राकृतिक आपदा ने कृषि और पशुपालन जैसे ग्रामीण आजीविका के स्तंभों को भी गहरा नुकसान पहुंचाया है।

मानसून का यह चेहरा डरावना

इस बार का मानसून हिमाचल के लिए सिर्फ एक मौसमीय बदलाव नहीं, बल्कि एक गंभीर आपदा बन गया है। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और सड़कों का ध्वस्त होना न केवल लोगों की दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर चुका है, बल्कि विकास के पहिए को भी धीमा कर दिया है।

राज्य प्रशासन राहत और पुनर्वास कार्यों में जुटा है, लेकिन मौसम की मार से निपटने के लिए अब अधिक सतर्क और ठोस रणनीति की जरूरत महसूस की जा रही है।