चंडीगढ़, 4 जुलाई: शहर की एक शांत शाम को जब सभागार का पर्दा उठा, तो मंच पर भारत की विविधता और सांस्कृतिक धरोहर ने सजीव रूप धारण कर लिया। मौका था शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन का, जहाँ दिनभर नीति और विकास की चर्चाओं के बाद शाम को सांस्कृतिक संध्या में भारत की आत्मा को स्पर्श किया गया।
इस गरिमामयी आयोजन में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविंद्र कल्याण, कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, तथा अन्य गणमान्य अतिथिगण उपस्थित रहे। मंच पर उपस्थित सभी माननीयों के चेहरे उस समय गौरव से खिल उठे जब कलाकारों ने रंग-बिरंगे परिधानों और सधी हुई लय में भारत की संस्कृति को जीवंत किया।
गंधर्व वाद्य संगीत से हुई शुरुआत – स्वर और ताल का दिव्य संगम
कार्यक्रम की शुरुआत एक अनोखी और गूढ़ अनुभूति देने वाली प्रस्तुति से हुई। पंडित चेतन जोशी के निर्देशन में प्रस्तुत गंधर्व वाद्य संगीत ने माहौल को आध्यात्मिक स्पर्श दिया। वाद्य यंत्रों की स्वरलहरियों में गंधर्वों की अमूर्त उपस्थिति महसूस होने लगी।
इस प्रस्तुति में वादकों ने पारंपरिक भारतीय वाद्य जैसे बांसुरी, तबला, संतूर, पखावज और सारंगी के माध्यम से लोक और शास्त्रीय का बेजोड़ संगम पेश किया। स्वर और लय जैसे संवाद करते हुए सभागार में बह निकले और हर दर्शक उस लय में खो गया।
हरियाणवी लोकनृत्य ने बाँधा समां – देसी ठाठ में झलकी परंपरा
इसके बाद जब मंच पर मोंटी शर्मा पार्टी के कलाकारों ने पारंपरिक हरियाणवी लोकनृत्य प्रस्तुत किया, तो सभागार की दीवारें भी जैसे थिरक उठीं। लोक वेशभूषा में सजे-धजे कलाकारों ने हरियाणा की मिट्टी की खुशबू अपनी चपल मुद्राओं, गीतों और घूमर जैसे गतियों से दर्शकों तक पहुँचा दी।
देश के कोने-कोने से आए जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध हो गए। कलाकारों की जीवंत ऊर्जा ने हर किसी को जोश से भर दिया और पूरे सभागार में तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही।
“भारत के रंग” – एकता में अनेकता की जीवंत झलक
सांस्कृतिक संध्या की अंतिम प्रस्तुति ने समूचे भारत की आत्मा को एक मंच पर समेट दिया। संजय शर्मा की पार्टी द्वारा कोरियोग्राफ की गई इस रचनात्मक प्रस्तुति में देश की विविध संस्कृतियों, भाषाओं, परंपराओं और रंगों को नृत्य और अभिनय के माध्यम से बेहद संवेदनशीलता और कलात्मकता के साथ दर्शाया गया।
“भारत के रंग” नामक इस प्रस्तुति ने दर्शकों को कश्मीर से कन्याकुमारी, गुजरात से अरुणाचल तक के लोक जीवन से जोड़ दिया। हर कलाकार की परफॉर्मेंस में एक सच्ची श्रद्धा, गर्व और देशभक्ति की भावनाएँ स्पष्ट झलक रही थीं।
लोक संस्कृति विभाग की प्रेरणादायक पहल
यह पूरी सांस्कृतिक संध्या सूचना, लोक संपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित की गई, जिसने इस आयोजन को महज़ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सांस्कृतिक संवाद बना दिया।
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