8 साल बाद GST में सबसे बड़ा बदलाव तय – PMO ने दी मंजूरी, 12% स्लैब हो सकता है खत्म!

चंडीगढ़, 16 जुलाई: वस्तु एवं सेवा कर (GST) को लागू हुए 8 साल हो चुके हैं, और अब केंद्र सरकार इसमें अब तक का सबसे बड़ा और अहम संशोधन करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस बड़े बदलाव को हरी झंडी दे दी है। यह प्रस्ताव अब अगस्त 2025 में संसद के मानसून सत्र के बाद होने वाली GST काउंसिल की बैठक में रखा जाएगा।

क्या है प्रस्तावित बदलाव?

वर्तमान में भारत में 5 प्रमुख GST स्लैब हैं:
🔹 0%
🔹 5%
🔹 12%
🔹 18%
🔹 28%

अब सरकार 12% टैक्स स्लैब को हटाने की योजना बना रही है।
इस स्लैब के तहत आने वाले सामानों और सेवाओं को
➡️ या तो 5%
➡️ या फिर 18%
स्लैब में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

सरकार यह कदम क्यों उठा रही है?

सरकार का मुख्य उद्देश्य है:
✅ टैक्स ढांचे को सरल बनाना
✅ टैक्स प्रक्रिया को पारदर्शी और सहज बनाना
✅ व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत देना
✅ लंबे समय से उठ रही उद्योग जगत की मांगों को संबोधित करना

सरकार का मानना है कि अब भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर है और GST रेवेन्यू लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह सुधार का अनुकूल समय है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

  • कई इंडस्ट्रीज लंबे समय से टैक्स स्लैब की संख्या घटाने की मांग कर रही थीं।

  • 12% स्लैब के हटने से बहुत-से उत्पादों की कीमत में बदलाव संभव है, जिससे कुछ क्षेत्रों को राहत, तो कुछ को थोड़ी चुनौती मिल सकती है।

  • हालांकि, समग्र रूप से यह बदलाव कारोबारी माहौल में स्थिरता और विश्वास बढ़ा सकता है।

किन वस्तुओं पर पड़ सकता है असर?

12% स्लैब में अभी ये चीजें शामिल हैं:
🧴 घरेलू सामान (सैनिटाइजर, टूथपेस्ट, हेयर ऑयल)
🪑 फर्नीचर
📺 कुछ इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स
🏫 कुछ एजुकेशनल सेवाएं
📚 किताबों की प्रिंटिंग और पब्लिशिंग

इनमें से कई को अब या तो 5% या 18% पर डाला जाएगा, जिससे इनकी कीमतें घट या बढ़ सकती हैं।

मुआवजा उपकर पर भी पुनर्विचार

  • 28% स्लैब में आने वाले लक्ज़री और सिन टैक्स उत्पादों पर मुआवजा उपकर लगाया जाता है।

  • यह उपकर राज्यों को राजस्व घाटा भरने के लिए था।

  • पहले यह 2022 तक सीमित था, लेकिन अब इसे 2026 तक बढ़ाया गया है।

  • अब इस उपकर की समीक्षा की जाएगी — यह जारी रहेगा या बंद होगा, इस पर आने वाली बैठक में निर्णय होगा।

क्या होगा आगे?

  • अगस्त 2025: मानसून सत्र के बाद GST काउंसिल की बैठक

  • वहां इस प्रस्ताव पर चर्चा और अंतिम निर्णय

  • यदि पास हुआ, तो आने वाले महीनों में 12% स्लैब हटाया जा सकता है

इस बदलाव का संभावित असर:

क्षेत्र संभावित असर
व्यापार टैक्स स्ट्रक्चर में स्पष्टता और सरलता
उपभोक्ता कुछ उत्पाद सस्ते, कुछ महंगे हो सकते हैं
उद्योग टैक्स अनुपालन में आसानी, अनुमान बेहतर
सरकार टैक्स कलेक्शन में पारदर्शिता और स्थिरता