थाली से थैले तक राहत! GST में बदलाव से घट सकते हैं रोजमर्रा की चीज़ों के दाम!

चंडीगढ़, 3 जुलाई: देश की आम जनता जो लगातार बढ़ती महंगाई की मार झेल रही है, उनके लिए केंद्र सरकार की ओर से जल्द एक बड़ी राहत भरी घोषणा हो सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दरों में बदलाव की तैयारी में है, जिसका सीधा लाभ आम आदमी की जेब को मिलेगा।

बताया जा रहा है कि सरकार 12% वाले टैक्स स्लैब को खत्म कर सकती है और इसकी जगह इन उत्पादों को 5% वाले कम स्लैब में शामिल करने का प्रस्ताव है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो घर-घर में इस्तेमाल होने वाली कई चीजों की कीमतें सीधे तौर पर घट जाएंगी।

कौन-कौन सी चीजें हो सकती हैं सस्ती?

अगर 5% GST स्लैब का दायरा बढ़ता है, तो निम्नलिखित आवश्यक और रोजमर्रा की वस्तुओं के सस्ते होने की संभावना है:

  • ₹1000 से कम कीमत वाले जूते, चप्पल और कपड़े

  • घी, मक्खन, पनीर और डेयरी स्प्रेड्स

  • प्रोसेस्ड मीट और फिश प्रोडक्ट्स, डेयरी पेय, टॉफी और कैंडी

  • नमकीन, भुजिया, सोया बरी, सिरका और फ्रूट जेली

  • सूखे मेवे, डिब्बाबंद सब्जियां और मशरूम

  • 20 लीटर की सीलबंद बोतल वाला पानी

  • पेंसिल, सस्ते चश्मे, कॉटन बैग और बच्चों के खेल के सामान

  • पास्ता, नूडल्स और मैकरोनी जैसे तैयार खाद्य उत्पाद

इसका सीधा अर्थ है कि आम आदमी की थाली, बच्चों का स्कूल बैग, किचन की डेली लिस्ट और पहनावे—all-in-one सस्ता हो सकता है।

राज्यों की सहमति बनी रहेगी सबसे बड़ी चुनौती

इस प्रस्ताव को अमल में लाने के लिए केंद्र सरकार को राज्यों का समर्थन हासिल करना जरूरी होगा। 12% स्लैब में मौजूद वस्तुएं वर्तमान में राज्यों के लिए एक अहम राजस्व स्रोत हैं। ऐसे में इन उत्पादों को 5% स्लैब में डालना राज्यों की आय को प्रभावित कर सकता है।

इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई का आश्वासन देना होगा या फिर उन्हें आर्थिक रूप से सहयोग करना होगा। तभी यह फैसला हकीकत में तब्दील हो पाएगा।

वैकल्पिक रास्ते भी हो सकते हैं चर्चा में

विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार एक और विकल्प पर विचार कर सकती है: 12% स्लैब को खत्म कर सभी वस्तुओं को या तो 5% या 18% स्लैब में शामिल कर दिया जाए। लेकिन जरूरी वस्तुओं को अगर 5% में डाला जाए, तो इससे गरीब और मध्यम वर्ग को महंगाई के प्रभाव से राहत मिल सकती है। वहीं, गैर-जरूरी वस्तुओं को 18% में रखकर राजस्व संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

कब आएगा बड़ा फैसला?

यह प्रस्ताव अगली GST काउंसिल मीटिंग में लाया जा सकता है। बैठक में राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ चर्चा होगी कि किन वस्तुओं को 5% स्लैब में डाला जाए, किन्हें उच्च स्लैब में रखा जाए और किस तरह से राजस्व संतुलन बैठाया जाए।

अगर इस पर सहमति बन जाती है, तो जल्द ही यह बदलाव लागू किया जा सकता है — जिसका असर बाजार में उत्पादों की कीमतों पर दिखाई देगा।

जनता को क्या होगा फायदा?

  • घर का मासिक बजट होगा हल्का

  • खाद्य और डेयरी उत्पाद सस्ते होंगे

  • स्कूली बच्चों के सामान और पहनावे की लागत घटेगी

  • लंबे समय से चली आ रही महंगाई को कुछ हद तक रोका जा सकेगा