चंडीगढ़, 23 जुलाई: गोरखपुर जिले के बिछिया स्थित पीएसी ट्रेनिंग सेंटर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब लगभग 600 महिला सिपाहियों ने प्रशासन की व्यवस्थाओं के खिलाफ एक साथ विरोध जताया। बुधवार को सेंटर से अचानक रोती-बिलखती और नाराज महिला ट्रेनी सिपाहियां बाहर निकलीं और सुरक्षा, सुविधाएं और सम्मान जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल खड़े किए।
बाथरूम में कैमरे! – महिला सिपाहियों की सुरक्षा पर सवाल
सबसे गंभीर आरोप यह है कि बाथरूम में कैमरे लगे हैं।
-
एक महिला ट्रेनी सिपाही ने बताया कि बाथरूम में छिपे हुए कैमरों के जरिए वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है।
-
इस मुद्दे को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया गया लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
यह न केवल नैतिक और कानूनी रूप से गलत है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और निजता के खिलाफ सीधा हमला है।
बिजली-पानी की भारी किल्लत
ट्रेनिंग कैंपस में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं:
-
रातभर बिजली गायब, जनरेटर की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
-
पानी सुबह उपलब्ध नहीं, दिन भर में सिर्फ आधा लीटर पानी दिया जाता है
-
खाने की गुणवत्ता बेहद खराब — कई महिलाओं ने पेट खराब होने की शिकायत की
संख्या अधिक, व्यवस्था कम
ट्रेनिंग सेंटर की कुल क्षमता 360 लोगों की है, लेकिन वहां 600 से अधिक महिला सिपाहियों को ठूंसा गया है।
-
सोने, बैठने और साफ-सफाई की व्यवस्था न के बराबर
-
इस भीड़ में न बीमारी से बचाव संभव है, न व्यक्तिगत स्वच्छता की देखरेख
प्रेग्नेंसी जांच पर मचा विवाद
ट्रेनिंग के बीच एक नया विवाद उभरकर सामने आया जब डीआईजी रोहन पी. ने सभी अविवाहित महिला सिपाहियों की प्रेग्नेंसी जांच का आदेश दिया।
-
इसके लिए मेडिकल टीम भी मौके पर बुला ली गई
-
इस आदेश का कड़ा विरोध हुआ, जिसके बाद आईजी ट्रेनिंग चंद्र प्रकाश ने हस्तक्षेप कर यह आदेश रद्द किया
-
अब केवल शपथ पत्र देना होगा कि सिपाही गर्भवती नहीं है, यदि कोई है तो उसे अगले बैच में ट्रेनिंग दी जाएगी
स्थिति पर प्रशासन का रुख
हंगामा बढ़ने पर ट्रेनिंग सेंटर के वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और महिला सिपाहियों को समझाने की कोशिश की।
-
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है
-
प्रशासन का कहना है कि जल्द ही सभी शिकायतों और समस्याओं का समाधान किया जाएगा
क्यों यह मामला सिर्फ ‘व्यवस्था’ का नहीं है?
यह पूरी घटना दर्शाती है कि जो महिला सिपाही देश और समाज की रक्षा करने का संकल्प लेकर प्रशिक्षण लेने आई हैं, उन्हें स्वयं असुरक्षा, असम्मान और बदइंतजामी का सामना करना पड़ रहा है।
-
सुरक्षा के नाम पर निगरानी की आड़ में निजता का हनन
-
मूलभूत सुविधाओं में लापरवाही
-
महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रहपूर्ण नजरिया
सवाल जो प्रशासन से पूछे जाने चाहिए:
-
क्या महिला सिपाहियों की निजता और गरिमा की कोई कीमत नहीं?
-
जब प्रशिक्षण की बुनियादी ज़रूरतें ही पूरी नहीं होंगी, तो क्या वे प्रभावी सिपाही बन पाएंगी?
-
कैमरे लगाने जैसे गंभीर आरोप की निष्पक्ष जांच कब और कैसे होगी?
-
प्रेग्नेंसी जांच का आदेश किस संवैधानिक या कानूनी अधिकार के तहत दिया गया?
Top Tags