चंडीगढ़, 25 जून: देश की राजधानी दिल्ली समेत देशभर में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट बाजार विश्लेषकों और निवेशकों के बीच एक खास कारण से जुड़ी बताई जा रही है – मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव में संभावित नरमी। इस बदलाव ने वैश्विक बाजार में “सुरक्षित निवेश” के रूप में माने जाने वाले सोने की मांग को कम कर दिया है।
दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम लगभग ₹900 घटकर ₹98,900 तक आ गई, जबकि 99.5% शुद्धता वाला सोना भी ₹800 की गिरावट के साथ ₹98,300 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुँच गया। वहीं, चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग ₹1,000 की कमी के साथ ₹1,04,200 प्रति किलोग्राम रह गई।
फ्यूचर्स मार्केट में भी असर: निवेशकों की मुनाफावसूली जारी
देश के प्रमुख वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोने के दामों में कमजोरी देखने को मिली। अगस्त डिलीवरी वाले सोने के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत ₹1,452 की भारी गिरावट के साथ ₹97,936 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई। यह संकेत करता है कि निवेशकों ने हाल के ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली शुरू कर दी है, खासकर ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक तनाव में राहत के संकेत मिलने लगे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज में सोने के वायदा मूल्य में भी गिरावट दर्ज की गई, जो 0.86% की गिरावट के साथ $3,339.57 प्रति औंस पर आ गया। इसका सीधा संबंध वैश्विक बाजार की बदलती भावनाओं और आगामी आर्थिक संकेतों से जोड़ा जा रहा है।
जानकारों की राय: क्यों गिर रहे हैं दाम?
अबान्स फाइनेंशियल सर्विसेज के CEO चिंतन मेहता का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से सोने की सुरक्षित निवेश के तौर पर मांग में कमी आई है। निवेशकों को अब लगता है कि हालात स्थिर हो सकते हैं, इसलिए वे मुनाफा बुक कर रहे हैं और अपने निवेश का पुनः मूल्यांकन कर रहे हैं।
वहीं, एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच संभावित पूर्ण युद्धविराम की उम्मीदों ने बाजार को राहत दी है। इससे पहले सोने की मांग उच्च स्तर पर थी क्योंकि निवेशक अस्थिरता के समय सोने को सुरक्षित आश्रय मानते हैं, लेकिन जैसे-जैसे स्थितियां सामान्य होने लगीं, निवेशकों ने जोखिम उठाने की प्रवृत्ति अपनाई और सोने से बाहर निकलने लगे।
ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता
इस समय निवेशकों की नजरें अमेरिका की आर्थिक नीतियों और खासतौर पर फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठकों पर टिकी हुई हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल जल्द ही कांग्रेस में अपनी गवाही देने वाले हैं, जहां से ब्याज दरों को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है।
अगर अमेरिकी फेड ब्याज दरों में कटौती की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो इससे डॉलर कमजोर होगा और सोने की मांग फिर से बढ़ सकती है। लेकिन अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो निवेशक बैंकिंग और बॉन्ड मार्केट जैसे पारंपरिक विकल्पों की ओर आकर्षित होंगे, जिससे सोने पर दबाव बना रहेगा।
क्या आगे और सस्ती हो सकती है चांदी-सोना?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अगर भू-राजनीतिक स्थिति स्थिर बनी रहती है और फेडरल रिजर्व अपनी सख्त मौद्रिक नीति को जारी रखता है, तो सोने-चांदी की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। हालांकि, किसी भी अप्रत्याशित घटना या बाजार में उथल-पुथल की स्थिति में कीमतों में तेजी से उछाल भी संभव है।
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