गीता पढ़कर मुस्लिम से बना हिंदू! पाकिस्तान में जन्मे आरिफ का बाबा बागेश्वर से सवाल और मिला दिल छू लेने वाला जवाब!

चंडीगढ़, 18 जुलाई:  ब्रिटेन के एक मंच पर, हाल ही में ऐसा संवाद हुआ जिसने सोशल मीडिया की दुनिया में हलचल मचा दी। चर्चा है बाबा बागेश्वर—यानी महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री—और एक खास शख्सियत मोहम्मद आरिफ अजाकिया के बीच हुई बातचीत की, जो अब इंटरनेट पर वायरल हो चुकी है।

इस वीडियो में, जो कथित रूप से बाबा बागेश्वर के यूके दौरे का बताया जा रहा है, एक मुसलमान परिवार में जन्मे आरिफ ने बाबा से ऐसा सवाल पूछ लिया, जिसने न केवल भीड़ को सोचने पर मजबूर कर दिया बल्कि बाबा का जवाब सुनकर लोग तालियों से गूंज उठे।

कौन हैं मोहम्मद आरिफ अजाकिया?

आरिफ ने बताया कि उनका जन्म पाकिस्तान में हुआ, हालांकि उनके माता-पिता का जन्म भारत में हुआ था और वे 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए। आरिफ ने अपनी बात में बताया कि वह एक मुस्लिम परिवार में पले-बढ़े, लेकिन समय के साथ उन्होंने भगवद गीता पढ़ी, उसका गहराई से अध्ययन किया और फिर स्वयं हिंदू धर्म को स्वीकार किया।

आरिफ का सवाल: क्या हिंदू होने के लिए नाम बदलना ज़रूरी है?

पब्लिक मंच से आरिफ ने बड़ी विनम्रता से पूछा:

“मैं गीता पढ़कर हिंदू बना हूं, पर लोग मुझसे कहते हैं कि अब मुझे अपना नाम बदल लेना चाहिए। क्या हिंदू होने के लिए नाम बदलना ज़रूरी है? क्योंकि नाम बदलना आसान नहीं होता, दस्तावेज़ों से लेकर बच्चों के सर्टिफिकेट तक सब कुछ बदलवाना पड़ता है। क्या बिना नाम बदले भी मैं हिंदू रह सकता हूं?”

इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा:

“आप कहते हैं कि भारतीय बनकर रहो, तो क्या पाकिस्तान में जन्मा व्यक्ति दिल से भारतीय नहीं हो सकता?”

बाबा बागेश्वर का जवाब: “आप गीता मानते हैं, तो आप हमारे हैं”

बाबा बागेश्वर का उत्तर न सिर्फ शांत, स्पष्ट और बेबाक था, बल्कि भावनाओं से भरा हुआ भी था। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा:

“हिंदुत्व कोई धर्म नहीं है, यह मानवता की विचारधारा है। इसमें नाम, जाति, रंग, रूप या देश से फर्क नहीं पड़ता। अगर आप गीता का पालन करते हैं, तो आप हमारे हैं।”

बाबा ने आगे उदाहरण देते हुए कहा:

“हम रहीम और रसखान के पद गाते हैं, और डॉ. अब्दुल कलाम को सिर झुकाकर सलाम करते हैं। हिंदू बनने के लिए नाम बदलना अनिवार्य नहीं है। अगर आपके विचार बदल गए हैं, तो हमारे लिए वही पर्याप्त है।”

“पाकिस्तान भी तो कभी भारत था”

आरिफ के दूसरे सवाल पर—कि क्या पाकिस्तान में जन्मा व्यक्ति भारतीय नहीं हो सकता—बाबा ने जवाब दिया:

“1947 से पहले पाकिस्तान भी तो भारत का ही हिस्सा था। एक खिंची हुई लकीर ने भले दीवार बना दी, लेकिन दिल अगर भारतीय है, तो जन्मस्थान मायने नहीं रखता। दिल में अगर हिंदुस्तान बसता है, तो वो व्यक्ति भी हिंदुस्तानी ही है।”

इस पर मंच पर जोरदार तालियां गूंज उठीं और लोग बाबा के इस बेबाक जवाब की प्रशंसा करने लगे।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

यह वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है। लाखों लोग इसे देख चुके हैं, और हजारों लोग कमेंट कर बाबा बागेश्वर के धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत की बात करने के अंदाज़ की तारीफ कर रहे हैं। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन इंटरनेट पर इसकी चर्चा ज़ोरों पर है।

क्या कहता है समाज?

यह घटना सिर्फ एक धार्मिक चर्चा नहीं, बल्कि धर्म और पहचान की जटिलताओं पर एक संवेदनशील संवाद है। जब किसी व्यक्ति के विचार बदलते हैं, तो क्या उसे अपनी पहचान भी पूरी तरह बदलनी चाहिए? या फिर विचारों की सच्चाई ही काफी है?

बाबा बागेश्वर के जवाब में यही संदेश है — “नाम नहीं, मन का परिवर्तन ही असली धर्म है।”