फिल्मिस्तान स्टूडियो: 85 साल की विरासत का अंत, अब बनेगी 50 मंजिला इमारत | काजोल-रानी के दादा ने की थी शुरुआत!

चंडीगढ़, 8 जुलाई: मुंबई के मशहूर फिल्मिस्तान स्टूडियो, जिसने दशकों तक हिंदी सिनेमा की नींव मजबूत की और कई ऐतिहासिक फिल्मों को जन्म दिया, अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। एक सुनहरा अध्याय 3 जुलाई 2025 को आधिकारिक रूप से बंद हो गया, जब इस स्टूडियो को 183 करोड़ रुपये में रियल एस्टेट कंपनी अर्केड डिवेलपर्स को बेच दिया गया।

शुरुआत एक सपने से, समापन एक सौदे पर

साल 1943 में, हिंदी सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की सोच के साथ, शशधर मुखर्जी — जो कि अभिनेत्री काजोल और रानी मुखर्जी के दादा थे — ने अपने बहनोई अशोक कुमार और साथियों ज्ञान मुखर्जीबहादुर चुन्नीलाल के साथ इस स्टूडियो की स्थापना की थी।

तब बॉम्बे टॉकीज से अलग होकर उन्होंने एक ऐसे संस्थान की नींव रखी, जिसने “जागृति”, “तुमसा नहीं देखा”, “अनारकली”, “नागिन”, जैसी ऐतिहासिक फिल्मों की शूटिंग का घर बना।

वो मंदिर, वो शादियाँ, वो अंतिम संस्कार… अब सब इतिहास

फिल्मिस्तान स्टूडियो सिर्फ ईंटों और दीवारों का ढांचा नहीं था, यह एक भावनात्मक विरासत था। यहां के 7 शूटिंग फ्लोर, गार्डन, और वो पुराना मंदिर — सब किसी न किसी फिल्म में नज़र आ चुके हैं। न जाने कितनी शादियों के दृश्य, अंतिम संस्कार, और गहरे भावुक क्षणों की रिकॉर्डिंग इसी ज़मीन पर हुई।

कई पीढ़ियों के एक्टर्स और टेक्नीशियंस ने यहीं से अपने करियर की शुरुआत की।

183 करोड़ में बिका, अब 3000 करोड़ के प्रोजेक्ट की तैयारी

अब जब इसे 183 करोड़ रुपये में खरीदा गया है, तो इसकी जगह पर बनने वाला नया प्रोजेक्ट और भी बड़ा है। अर्केड डिवेलपर्स की योजना है कि यहां एक लग्जरी रेजिडेंशियल टॉवर बनाया जाए, जिसकी कुल लागत करीब 3000 करोड़ रुपये होगी।

इस प्रोजेक्ट में होंगे:

  • 2 गगनचुंबी टावर

  • 50 मंजिल तक ऊंचाई

  • 3, 4 और 5 BHK फ्लैट्स

  • लक्ज़री पेंटहाउस

यह निर्माण 2026 में शुरू हो सकता है और मुंबई के रियल एस्टेट में एक नया अध्याय जोड़ेगा।

हैदराबाद के निज़ाम की फंडिंग और गौरवशाली फिल्में

बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मिस्तान की स्थापना में फंडिंग की गई थी हैदराबाद के तत्कालीन निज़ाम मीर उस्मान अली खान द्वारा। उन्होंने एक दूरदर्शी सोच के तहत इस सपने में निवेश किया, जिससे “शहीद (1948), शबनम (1949), सरगम (1950), पेइंग गेस्ट (1957)” जैसी फिल्में बनीं।

फिल्म स्टूडियो से स्काईलाइन की ओर

यह तीसरा प्रमुख स्टूडियो है जिसे अब मल्टीस्टोरी रेजिडेंशियल टॉवर में बदला जा रहा है:

  1. आर. के. स्टूडियो (चेंबूर)

  2. कमालिस्तान स्टूडियो (जोगेश्वरी)

  3. अब फिल्मिस्तान स्टूडियो (गोरेगांव क्षेत्र के पास)

यह ट्रेंड बता रहा है कि मुंबई अब सिनेमा से रियल एस्टेट की दिशा में कदम बढ़ा रहा है — जहां कैमरों की जगह अब क्रेनों और बिल्डरों का कब्जा होगा।

एक विरासत की विदाई

यह सौदा उन तमाम लोगों के लिए एक भावुक झटका है जिन्होंने फिल्मिस्तान को सिर्फ एक लोकेशन नहीं, बल्कि एक सपने की कार्यशाला के रूप में देखा। इस जगह ने भारतीय सिनेमा को उसका स्वर्ण युग दिया, और अब वह शोरूम और स्काईव्यू बालकनियों में बदल जाएगी।