चंडीगढ़, 24 जून: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी और बदलती जीवनशैली ने लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। उन्हीं में से एक है फैटी लिवर—एक ऐसी समस्या, जो पहले तक कम सुनाई देती थी, लेकिन अब तेजी से आम होती जा रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में फैटी लिवर की आशंका कहीं अधिक पाई जा रही है।
हाल ही में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया, जिसमें एक विशेष मशीन के ज़रिए लोगों के लिवर की जांच की गई। इस जांच के नतीजे चौंकाने वाले थे—फैटी लिवर से पीड़ित लोगों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा कहीं अधिक निकली।
जांच कैसे की गई?
इस विशेष स्वास्थ्य जांच में BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स का उपयोग किया गया। यह एक ऐसा मापदंड है, जो व्यक्ति की लंबाई, वजन और कमर की माप के आधार पर शरीर में वसा (फैट) की मात्रा का अनुमान लगाता है।
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महिलाओं के लिए यदि कमर की माप 80 सेंटीमीटर से अधिक हो जाती है, तो यह संकेत हो सकता है कि उनके लिवर में चर्बी जमने लगी है।
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इसके साथ-साथ ब्लड टेस्ट और अन्य स्क्रीनिंग प्रक्रियाओं के ज़रिए यह पुष्टि की गई कि कई महिलाएं फैटी लिवर की शिकार हैं।
क्यों महिलाओं में अधिक होता है फैटी लिवर का जोखिम?
डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। हर महिला की जीवनशैली, हार्मोनल स्थिति और स्वास्थ्य की आदतें अलग होती हैं, लेकिन कुछ सामान्य कारण ये हो सकते हैं:
मुख्य कारण:
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हार्मोनल असंतुलन (जैसे- थायरॉइड, पीसीओडी आदि)
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मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी
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डायबिटीज़ (टाइप 2 मधुमेह)
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कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना
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अनियंत्रित दवा सेवन, खासकर दर्द निवारक और स्टेरॉइड्स
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कुछ मामलों में शराब का सेवन
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तनाव और नींद की कमी
फैटी लिवर के लक्षण – नजरअंदाज न करें ये संकेत!
फैटी लिवर अक्सर बिना लक्षण के विकसित होता है, लेकिन जब यह बढ़ने लगता है, तो शरीर कई तरह से संकेत देने लगता है:
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बार-बार थकान और कमजोरी
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पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन
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भूख कम लगना और वजन घटना
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पीलापन – आंखों या त्वचा में
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गहरे रंग का पेशाब
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सुबह के समय उल्टी या मतली
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पेट फूलना, अपच और गैस की समस्या
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कुछ मामलों में शरीर में सूजन भी दिख सकती है
बचाव ही सबसे बेहतर इलाज है – अपनाएं ये उपाय
फैटी लिवर का कोई विशेष इलाज नहीं होता, लेकिन अच्छी आदतें इसे होने से रोक सकती हैं और इसके प्रभाव को कम कर सकती हैं:
✅ जीवनशैली में जरूरी बदलाव:
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रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज या योग करें
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संतुलित आहार लें – ज्यादा तले-भुने, चीनी और फैटी फूड से परहेज करें
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हरी सब्जियां, साबुत अनाज, ताजे फल और फाइबर युक्त आहार अपनाएं
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शराब और धूम्रपान पूरी तरह से छोड़ें
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दिनभर में पर्याप्त पानी पीएं ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो
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ग्रीन टी और हर्बल टी का सेवन करें, जो मेटाबॉलिज्म को सुधारते हैं
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नींद पूरी करें और तनाव कम करें – इससे हार्मोन संतुलन बना रहता है
एक्सपर्ट की सलाह:
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को लेकर पहले से ज्यादा सजग रहने की जरूरत है। फैमिली, करियर और घर की जिम्मेदारियों के चलते वे अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं, जो लंबे समय में खतरनाक साबित हो सकता है।
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