चंडीगढ़, 24 जुलाई: दिल्ली से सटे गाजियाबाद के शांत कविनगर इलाके में इन दिनों एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि देशभर की सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। यहां एक आलीशान कोठी में, कोई विदेशी दूतावास नहीं बल्कि चार “फर्जी दूतावास” चलाए जा रहे थे—वो भी उन देशों के नाम पर जो दुनिया के नक्शे में ही नहीं हैं।
जी हां, ये दूतावास थे वेस्ट आर्कटिका, पौल्विया, सबोर्गा और लोडोनिया के। और इन सबके पीछे था एक व्यक्ति—हर्षवर्धन जैन, जो खुद को इन देशों का एंबेसडर यानी राजदूत बताकर लोगों को भ्रमित करता रहा।
फर्जी दूतावास का “राजमहल”
हर्षवर्धन ने कविनगर में कोठी नंबर KB-45 को किराए पर लिया और वहां पर चार अलग-अलग देशों के झंडे लगा दिए। कोठी के बाहर लग्जरी गाड़ियां खड़ी रहतीं जिन पर “डिप्लोमैटिक” नंबर प्लेट लगी होती थी। आम लोग भी इसे देखकर यकीन करने लगते कि यहां कोई अंतरराष्ट्रीय मिशन चल रहा है।
वह लोगों को दावा करता था कि वे इन काल्पनिक देशों के माध्यम से विदेशों में व्यापार, नौकरी या वीजा की सुविधा पा सकते हैं — और इसके बदले मोटी रकम वसूल करता था।
कौन है हर्षवर्धन जैन?
इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड हर्षवर्धन कोई आम इंसान नहीं, बल्कि धोखाधड़ी की दुनिया का पुराना खिलाड़ी रहा है।
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दावा किया गया है कि उसने लंदन के कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज से एमबीए किया।
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गाजियाबाद स्थित आईटीएस कॉलेज से भी उसने पढ़ाई की।
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उसके पिता का कभी बड़ा मार्बल माइंस का व्यवसाय था, लेकिन उनके निधन के बाद हर्षवर्धन की जिंदगी में गिरावट शुरू हो गई।
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उसका संपर्क कुख्यात आध्यात्मिक नेता चंद्रास्वामी से हुआ, जिसने उसे विदेश भेजा और बताया जाता है कि उसने वहां फर्जी कंपनियां बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग में भी हाथ आजमाया।
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2011 में वह हवाला कारोबार में भी पकड़ा जा चुका है, और कुछ समय डासना जेल में भी रह चुका है।
कैसे पकड़ा गया पूरा खेल?
हर्षवर्धन करीब तीन वर्षों से कविनगर में यह साजिश चला रहा था। वो खुद को कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों का प्रतिनिधि बताकर प्रस्तुत करता था। 22 जुलाई 2025 को नोएडा एसटीएफ ने छापेमारी करते हुए उसके इस फर्जी राजनयिक साम्राज्य का पर्दाफाश किया।
फिलहाल जांच एजेंसियां उसके भारत और विदेशों में फैले नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। कई फर्जी दस्तावेज, सिफारिशी पत्र और डिप्लोमैटिक आईडी कार्ड बरामद हुए हैं।
असल में दूतावास होते क्या हैं?
एक दूतावास (Embassy) किसी देश का ऐसा राजनयिक कार्यालय होता है जो दूसरे देश में स्थापित किया जाता है, ताकि वहां के साथ आपसी संबंधों को मजबूत किया जा सके।
भारत में विदेशी दूतावास क्या काम करते हैं?
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अपने देश के नागरिकों की भारत में सहायता करना
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वीजा जारी करना
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व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और विज्ञान के समझौते कराना
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भारत की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों पर रिपोर्ट तैयार करना
दूतावास स्थापित करने के लिए भारत सरकार से विशेष अनुमति लेनी होती है। इनकी स्थापना केवल उन्हीं देशों की जा सकती है जो संयुक्त राष्ट्र या भारत द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।
फर्जी दूतावास को पहचानने के कुछ आसान तरीके
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भारत सरकार की वेबसाइट देखें:
MEA.gov.in पर सभी अधिकृत विदेशी दूतावासों की लिस्ट मौजूद होती है। -
लोकेशन देखें:
लगभग सभी असली दूतावास दिल्ली के चाणक्यपुरी क्षेत्र या बड़े शहरों के विशेष क्षेत्रों में स्थित होते हैं। -
असली दस्तावेज की जांच करें:
असली दूतावास ई-रसीद, ट्रैकिंग नंबर, और आधिकारिक सील प्रदान करते हैं। -
संदिग्ध व्यवहार पर सतर्क रहें:
यदि कोई व्यक्ति खुद को ‘राजदूत’ बताकर कैश में पैसे ले रहा हो, तो तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।
क्यों खतरनाक है ऐसा फर्जीवाड़ा?
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यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
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मासूम लोगों को धोखे में रखकर ठगा जा सकता है।
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इससे भारत की राजनयिक साख को नुकसान पहुंच सकता है।
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