चंडीगढ़, 31 मई: बढ़ती महंगाई से परेशान आम लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम और असरदार कदम उठाया है। खाने के तेल की कीमतों को नीचे लाने के इरादे से सरकार ने तीन प्रमुख कच्चे तेलों — पाम तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल — पर आयात शुल्क (कस्टम ड्यूटी) को 20% से घटाकर 10% कर दिया है।
इस फैसले को वित्त मंत्रालय ने हाल ही में जारी अधिसूचना के जरिए लागू किया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को जल्द ही बाजार में सस्ते तेल के रूप में फायदा मिलने की उम्मीद है।
कच्चे तेल पर राहत, घरेलू बाजार में होगा सीधा असर
भारत की खास बात यह है कि वह खाद्य तेल का लगभग 50% हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में आयात शुल्क में कटौती का असर सीधे खुदरा कीमतों पर पड़ता है। इसका मतलब है कि दुकानों में बिकने वाला तेल अब सस्ता हो सकता है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम तेल की रिफाइनिंग इंडस्ट्री को नई ऊर्जा देगा, साथ ही उपभोक्ताओं के लिए भी राहत का सबब बनेगा।
SEA के अनुसार, तीनों कच्चे तेलों पर अब कुल प्रभावी आयात शुल्क करीब 16.5% रह गया है, जो पहले 27.5% के करीब था।
रिफाइंड तेलों को अभी नहीं मिली राहत
हालाँकि, इस राहत का लाभ सिर्फ कच्चे तेल के आयात तक ही सीमित रहेगा। रिफाइंड पाम ऑयल और अन्य रिफाइंड तेलों पर फिलहाल भी 32.5% का आयात शुल्क लागू है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर जानबूझकर रखा गया है ताकि भारत के घरेलू तेल उद्योग को प्रोत्साहन मिले। जब कच्चा तेल सस्ता आएगा और रिफाइंड तेल महंगा रहेगा, तो रिफाइनिंग का काम देश में बढ़ेगा, जिससे घरेलू उत्पादन और रोजगार के अवसर दोनों बढ़ेंगे।
घरेलू तेल उद्योग को मिलेगा नया बल
सरकार के इस निर्णय को लेकर भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (IVPA) और SEA जैसे संगठन काफी उत्साहित हैं।
इन संगठनों का कहना है कि यह कदम बहुप्रतीक्षित था, और लंबे समय से तेल उद्योग इस मांग को दोहराता आ रहा था। कच्चे तेल के आयात में वृद्धि से देश के अंदर रिफाइनिंग यूनिट्स की कार्यक्षमता बढ़ेगी और साथ ही नए रोजगार के अवसर भी सामने आएंगे।
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