शनिवार करें इन उपायों को.. शनि देव होगें प्रसन्न

शनिवार को शनिदेव की पूजा का विधान है, शनिदेव जब प्रसन्न होने है जो सभी काम अपने आप बन जाते है वही जब शनिदेव नाराज होते है तो व्यक्ति को संकट का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही शनिदेव कर्मों के आधार पर फल देते हैं। अगर आप सद्कर्म करते हैं तो शनिदेव आप पर अपनी कृपा बरसाते हैं, लेकिन अनैतिक काम करने वालों पर शनिदेव की कृदृष्टि पड़ती है। इसलिए व्यक्ति को अच्छे कर्म करने का भी प्रावधान बताया जाता है।

शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। वहीं अगर किसी की कुंडली में शनि दोष है तो वह उनके अशुभ प्रभाव से बचने के लिए बहुत सारे उपाय किए जाते है जिनमें कुछ महत्वपूर्श उपाय आज हम जानते है। छायादान, शनि स्तोत्र का पाठ जैसे सरल और सस्ते उपाय कर हम शनि के प्रभाव यानी उनके कुप्रभाव से बच सकते है। इन 3 उपायों से हम उनको खुश कर सकते है।

माना जाता है कि शनिवार के दिन व्रत रखने,  हनुमान जी की पूजा करने, शनि स्तोत्र का पाठ करने, छायादान करने से शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। इससे शनि ग्रह आपको शुभ परिणाम देंगे। आप नैतिक और न्यायोचित कार्य करेंगें तो इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं औऱ शुभ फल देते है।

शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय

1- शनि देव के कुप्रभाव से बचने का सबसे प्रभावशाली  उपाय छायादान है। छायादान का मतलब है तेल से भरे बर्तन में अपनी छाया देखकर उसे दान करना। छायादान आप किसी भी दिन कर सकते हैं,  माना जाता है शनिवार को शनिदेव को तेल चढ़ाया जाता है इसलिए शनिवार के दिन किया गया छायादान सबसे कारगर माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि शनि देव छायादान करने से प्रसन्न होते हैं। हालांकि छायादान गुप्त तरीके से किया जाता है। इस बारे में किसी को बताया नहीं जाता है। छायादान करते समय आपका मन पवित्र होना चाहिए और विनम्रता का भाव अंदर से आना चाहिए।

 

2- अपने घर के आसपास किसी पीपल के पेड़ की जड़ में गुड़ और काले तिल मिलाकर जल चढ़ाएं । आपको लगातार 40 दिनों तक यह उपाय करना होगा और पीपल की जड़ में जल अर्पित करते समय शनिदेव को याद करें। इससे शनि ग्रह के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है। इसके अलावा रोजाना सूर्य को जल अर्पित करें। शाम को पीपल के पेड़ के नीचे काली बाती से दीया भी जला सकते है।

 

3- शनि देव की कुदृष्टि से बचने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए शनिवार को 11 बार शनि स्तोत्र का पाठ करें। अगर आप यह नहीं कर पा रहे हैं तो  आप रोजाना शनि स्तोत्र का पाठ करें।