चंडीगढ़, 24 जुलाई: जननायक जनता पार्टी (JJP) के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने भाजपा पर एक बार फिर से तीखा राजनीतिक हमला बोला है। इस बार निशाने पर भाजपा का कथित ‘मतलबी रवैया’ और देश के वरिष्ठ नेताओं के साथ किया गया व्यवहार है। उन्होंने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को केंद्र सरकार की “तानाशाही सोच” का नतीजा बताया।
“भाजपा को जनहित में उठी आवाज़ें नहीं सुहातीं” – दिग्विजय
दिग्विजय चौटाला ने आरोप लगाया कि जैसे ही जगदीप धनखड़ ने किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार से सवाल किया, तभी से भाजपा नेतृत्व ने उन्हें अलग-थलग करना शुरू कर दिया।
उन्होंने कहा:
“जिस दिन उपराष्ट्रपति धनखड़ ने मंच पर कृषि मंत्री से किसानों के मुद्दों पर जवाब मांगा, उसी दिन से उन्हें चुप कराने की कोशिशें शुरू हो गईं।”
धनखड़ और मलिक – ‘इस्तेमाल कर फेंक दो’ नीति के शिकार
JJP नेता ने कहा कि जगदीप धनखड़ और जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक दोनों किसान और जवान के पक्ष में खड़े हुए, लेकिन भाजपा की राजनीति में इस तरह की बेबाक आवाजें “फिट नहीं बैठतीं”।
“भाजपा को सिर्फ वही लोग पसंद हैं जो उसके गुण गाएं। जो सवाल उठाते हैं, उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है।”
पुलवामा हमले पर सवाल उठाने की कीमत चुकाई – मलिक का ज़िक्र
दिग्विजय चौटाला ने सत्यपाल मलिक के उस बयान को भी याद दिलाया जिसमें उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
उन्होंने कहा:
“मलिक जैसे वरिष्ठ नेता ने जब सच बोला, तो भाजपा ने उन्हें भी ठुकरा दिया। यह पार्टी सिर्फ चापलूसी पसंद करती है, सच बोलने वाले नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा देती है।”
ओमप्रकाश चौटाला के खिलाफ भी रची गई साजिशें
चौटाला ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा ने उनके खिलाफ भी राजनीतिक षड्यंत्र रचने की कोशिश की थी।
“लेकिन उनकी राजनीतिक सूझबूझ के आगे भाजपा की चालें काम नहीं आईं।”
“झुकने की बजाय बोले सच” – नेताओं की प्रशंसा
JJP नेता ने जगदीप धनखड़ और सत्यपाल मलिक दोनों की साफगोई और साहस की तारीफ करते हुए कहा कि:
“दोनों नेताओं ने भाजपा की तानाशाही के आगे झुकने से मना कर दिया। उन्होंने पद छोड़ना बेहतर समझा, लेकिन जनहित की आवाज़ को नहीं दबने दिया।”
दिग्विजय का आरोप: भाजपा करती है नेताओं का इस्तेमाल
दिग्विजय सिंह चौटाला ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए नेताओं को आगे करती है, लेकिन जैसे ही वे जनता के मुद्दों पर बोलते हैं, उन्हें किनारे कर देती है।
“धनखड़ और मलिक को सिर्फ चुनाव में समर्थन जुटाने और किसान समाज को साधने के लिए इस्तेमाल किया गया।”
Top Tags