धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और कुबरे भगवान की पूजा जरूर की जाती है. इनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनीं रहती है. कई लोग इस दिन अपने दफ्तर में भी मां लक्ष्मी औ कुबरे भगवान की एक साथ पूजा करते हैं. मान्यता है कि इनका एक साथ पूजन करने से व्यापार में वृद्धि होती है और कारोबार अच्छे से चलता है. आज पूरे देश में धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है. आप भी इस दिन मां लक्ष्मी और कुबरे भगवान की पूजा करें. पंचांग के अनुसार, शनिवार के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगायह पर्व हर वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है.
घर में सुख-समृद्धि, आरोग्य लाने का दिन
धनतेरस यानी धन त्रयोदशी दीपावली पर्व की शुरुआत मानी जाती है. यह दिन केवल खरीदारी का ही नहीं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि, आरोग्य और सकारात्मकता लाने का दिन होता है. धनतेरस की पूजा हमेशा प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि में की जाती है और इस दिन खरीदारी करने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि आज के दिन खरीदी गईं चीजों में 13 गुणा वृद्धि होती है. इस दिन की पूजा विधि को सही तरीके से करने से घर में धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य की वृद्धि होती है
मां लक्ष्मी और कुबरे भगवान का पूजा मुहूर्त
धनतेरस के दिन शाम के समय मां लक्ष्मी और कुबरे भगवान की पूजा की जाती है. इस दिन धन्वंतरि भगवान का भी पूजन होता है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार पूजा का समय शाम 7:11 बजे से शुरू हो जाएगा जो कि रात 9:22 बजे तक होगा. यानी पूजा की अविध कुल 2 घंटे 11 मिनट की है. 13 दीपक जलाकर भगवान कुबेर की पूजा करें. पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम होता है, इसलिए आर घर पर या कार्यालय में, इस समय पूजा कर लें.

कुछ परंपरा के साथ इस तरह की मान्यताएं भी मानी जाती है।
13 कौड़ियां रात में गाड़ने से धन लाभ होता है.
घर के अंदर और बाहर 13-13 दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
मां लक्ष्मी को लौंग अर्पित करने और सफेद वस्तुएं जैसे दूध, चावल या कपड़े दान करने से धन की कमी नहीं होती.
माना जाता है किन्नर को दान देना और उनसे सिक्का मांगना भी शुभ होता है.
धनतेरस पूजा सामग्री
भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति
दीपक (मिट्टी या पीतल का)
रोली, चावल, हल्दी, फूल, धूप-दीप
गंगाजल या स्वच्छ पानी
नए सिक्के या चांदी के सिक्के
कलश, नारियल, आम के पत्ते
मिठाई (खीर, बताशे, गुड़ या लड्डू)
पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, और शक्कर)

धनतेरस पूजा विधि
धनतेरस के दिन घर के ईशान कोण में पूजा करें, पूजन के समय आपका मुख ईशान, पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए. प्रदोश काल के समय भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमा, कैलेंडर, चित्र स्थापित करें. पूजन के समय पंचदेव की स्थापना करें और भगवान धन्वंतरि की षोडशोपचार विधि से पूजा करें. भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर ॐ धन्वंतरये नमः मंत्र का जाप करें. फिर उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं और तुलसी की पत्तियां चढ़ाएं. यह सेहत और लंबी उम्र के लिए शुभ माना जाता है. पूजन में भगवान धन्वंतरि को रोली, अक्षत, फल, फूल, खील-बताशे, मिठाई, मेवे आदि नैवेघ अर्पित करें. साथ ही मंत्रों का जप करते रहें. पूजा के समय घी का बड़ा दीपक जलाएं. साथ 13 दीपक जलाकर घर के अलग-अलग स्थानों पर रखें. इसके बाद आरती करें.
मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा
अब मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करें. दोनों को रोली और अक्षत से तिलक करें और पुष्प, धूप, खील-बताशे और दीप अर्पित करें. साथ ही सिक्के या नया धन पूजा में रखें और लक्ष्मी-कुबेर मंत्रों का जाप करें. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः। ॐ यं कुबेराय नमः। पूजा के अंत में मां और भगवान धन्वंतरि की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटें. मुख्य पूजा के बाद प्रदोष काल में दीपक जलाएं. एक दीपक यम के नाम का जलाएं और रात में घर के सभी कोनों में दीपक जलाए. 13 दीपक मेन गेट पर और 13 दीपक घर के अंदर जलाएं इस तरह आप धनतेरस के दिन पूजा करके घऱ मे सुख समृद्धि ला सकते है।
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