चंडीगढ़, 24 जून: दिल्ली की जनता के लिए अच्छी खबर आई है, खासकर उन श्रद्धालुओं और आयोजकों के लिए जो सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का आयोजन करते हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने इस धार्मिक यात्रा को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के लिए एक नई योजना को मंजूरी दी है। अब कांवड़ समितियों को मिलने वाली आर्थिक मदद सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि पहले की सरकारों के समय इस पावन आयोजन में भ्रष्टाचार और अनियमितता की शिकायतें सामने आती थीं, जिससे समितियों और श्रद्धालुओं तक उचित सहायता नहीं पहुंच पाती थी। लेकिन अब व्यवस्था में बदलाव लाया गया है, जिससे हर कांवड़ समिति को सीधे और समय पर आर्थिक मदद मिल सकेगी।
चार श्रेणियों में दी जाएगी आर्थिक सहायता, 50 हज़ार से लेकर 10 लाख रुपये तक
नई योजना के अनुसार, सहायता राशि को चार वर्गों में बांटा गया है। कोई भी रजिस्टर्ड कांवड़ समिति न्यूनतम ₹50,000 से लेकर अधिकतम ₹10,00,000 तक की सहायता के लिए आवेदन कर सकती है। इसके लिए टेंडर जैसी जटिल प्रक्रिया की जरूरत नहीं होगी।
समितियों को सिर्फ जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास रजिस्ट्रेशन करवाना होगा, जिसके बाद एकल खिड़की प्रणाली (Single Window System) के माध्यम से सारा कार्य किया जाएगा।
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सरल और समयबद्ध
सरकार ने साफ किया है कि इस बार रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 30 जुलाई रखी गई है। योजना को ‘मुख्यमंत्री धार्मिक उत्सव योजना’ नाम दिया गया है।
इसके तहत सहायता राशि दो किस्तों में दी जाएगी—पहली किस्त 50% रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद और दूसरी किस्त यात्रा के समापन के बाद दी जाएगी।
बिजली मुफ्त, निगरानी में नई तकनीक का प्रयोग
कांवड़ यात्रा के आयोजन में बिजली की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने हर समिति को 1200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है। इस बार प्रशासन आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर यात्रा पर निगरानी भी रखेगा।
SDM स्तर के अधिकारी यात्रा की व्यवस्थाओं पर नजर रखेंगे और Geo-tagging जैसी आधुनिक प्रणाली के ज़रिए पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।
यात्रियों का होगा विशेष स्वागत, संख्या में वृद्धि की तैयारी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी ऐलान किया कि इस बार कांवड़ यात्रियों का दिल्ली बॉर्डर पर विशेष स्वागत किया जाएगा। पिछली बार जहां 170 समितियों को सहायता दी गई थी, इस बार सरकार इस संख्या को और बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
योजना की निगरानी के लिए दिल्ली सरकार ने कपिल मिश्रा समेत चार विधायकों को विशेष जिम्मेदारी दी है, ताकि आयोजन बिना किसी रुकावट के संपन्न हो।
मुख्यमंत्री का संदेश: यह धार्मिक आयोजन नहीं, समाज सेवा का अवसर है
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि कांवड़ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति से जुड़ा सेवा पर्व है। सरकार का यह प्रयास श्रद्धालुओं को न केवल सुरक्षा और सम्मान, बल्कि विश्वास और सहयोग भी देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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