दुनिया भर के लोगों ने छठ पूजा की कल डूबते सूर्य़ को जल दिया गया और आज उगते सूर्य को जल दे कर छठ पूजा का समापन हुआ । वही कल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को कुरुक्षेत्र के पवित्र ब्रह्म सरोवर पर आयोजित राज्य स्तरीय छठ पूजा महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। मुख्यमंत्री सैनी ने छठ मईया की पूजा अर्चना में भाग लिया तथा डूबते सूर्य देव को अर्घ्य भी अर्पित किया । इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कहा कि सूर्य उपासना का यह महापर्व हमारी संस्कृति, आस्था और प्रकृति के गहरे जुड़ाव का प्रतीक है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि छठ महापर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सूर्य की ऊर्जा, जीवन और प्रकृति के संतुलन के प्रति मानव की कृतज्ञता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “पवित्र ब्रह्म सरोवर पर छठ पर्व की आस्था और शोभा को देखकर गर्व का अनुभव हो रहा है।”
छठ पर्व की ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा आरंभ की थी। यह परंपरा आज तक निरंतर चली आ रही है, जो हमारी प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की प्रतीक है।
प्रदेश में घाटों और धार्मिक स्थलों का विकास
मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा करनाल में सूर्य नारायण मंदिर के सामने पश्चिमी यमुना नहर पर 4 करोड़ 48 लाख रुपए की लागत से घाट का निर्माण कराया गया है। इसके साथ ही पानीपत, सोनीपत, पंचकूला, फरीदाबाद और यमुनानगर में भी पवित्र घाटों का निर्माण किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि कैथल जिले में भी शीघ्र ही एक नया घाट बनाया जाएगा।
इस अवसर पर पूर्व स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता, मेयर कुलभूषण गोयल, जिला अध्यक्ष अजय मित्तल, उपायुक्त सतपाल शर्मा, मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रे, पंचकूला छठ पूजा समिति के चेयरमैन संजय कुमार, प्रधान काशी नाथ, उप-प्रधान चंद्रेश्वर चौरसिया, महासचिव इंद्रजीत चौरसिया व अन्य मौजूद रहे।
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