चंडीगढ़, 11 जुलाई: हरियाणा सरकार ने विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता को बेहतर और पारदर्शी बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य में इंजीनियरिंग कार्यों की निगरानी के लिए तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को “Chief Minister Engineering Project Quality Monitors” के रूप में नियुक्त किया जाएगा। इन युवा मॉनिटर्स की भूमिका यह सुनिश्चित करना होगी कि निर्माण कार्य तय मानकों और समयसीमा के भीतर पूरे हों।
यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आयोजित गुणवत्ता आश्वासन प्राधिकरण (Quality Assurance Authority – QAA) की उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया।
क्या है ‘सीएम क्वालिटी मॉनिटर्स’ की भूमिका?
राज्य में चल रही सड़कों, इमारतों, जल आपूर्ति, सीवरेज, बिजली और सिंचाई जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में इन मॉनिटर्स की सीधी भागीदारी होगी। यह युवा इंजीनियर परियोजना स्थल पर जाकर कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी अनुपालन, पर्यावरणीय मानकों और निर्माण सामग्री की जांच करेंगे।
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि GATE उत्तीर्ण या तकनीकी रूप से योग्य युवाओं को इस कार्य के लिए चयनित किया जाए और इसके लिए पारदर्शी चयन प्रणाली विकसित की जाए।
गुणवत्ता की जांच में होगी पारदर्शिता
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि:
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निर्माण कार्यों की तकनीकी गुणवत्ता का ऑडिट किया जाए।
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सभी कार्यों को अंक प्रणाली (Marking System) के आधार पर मूल्यांकन किया जाए।
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ठेकेदारों को भुगतान भी इसी अंक प्रणाली से जोड़ा जाए।
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घटिया निर्माण के मामलों में न केवल ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए बल्कि सरकारी अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया जाए।
100 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की होगी विशेष निगरानी
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि जो परियोजनाएं 100 करोड़ रुपये से अधिक की हैं, उनका विशेष गुणवत्ता ऑडिट किया जाए ताकि समय और संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यों में देरी या मानकों की अनदेखी के लिए सिर्फ ठेकेदार नहीं, संबंधित विभागीय अधिकारी भी जिम्मेदार होंगे, और यह जानकारी उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में दर्ज होगी।
इंजीनियरिंग स्टाफ की होगी नियमित ट्रेनिंग
बैठक में यह भी तय किया गया कि:
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सभी इंजीनियरिंग विभागों के कर्मचारियों को HIPA या अन्य संस्थानों से नवीनतम तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाए।
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डीपीआर (DPR) बनाने वाले कंसल्टेंट, थर्ड पार्टी एजेंसियों, और गुणवत्ता पर्यवेक्षकों की पैनलिंग प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए।
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कार्यों में पर्यावरण-अनुकूल निर्माण विधियों को बढ़ावा दिया जाए।
गुणवत्ता के लिए बनाए गए 7 प्रमुख क्षेत्रीय मानदंड
गुणवत्ता आश्वासन प्राधिकरण के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने बताया कि प्राधिकरण ने सात मुख्य क्षेत्रों (सड़कें, भवन, जल आपूर्ति, सिंचाई, सीवरेज, बिजली प्रसारण व वितरण) के लिए तकनीकी गुणवत्ता मानदंड तैयार किए हैं।
इसके तहत:
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पहली बार जूनियर इंजीनियरों और एसडीई के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग प्रशिक्षण आयोजित किया गया है।
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थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसियों और डिज़ाइन कंसल्टेंट्स को भी शामिल किया गया है।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
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मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी
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मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर
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जनसंपर्क विभाग के महानिदेशक के. मकरंद पांडुरंग
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एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी
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