पंजाब की राजनीति में एक बार फिर केंद्र और राज्य के रिश्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भगवंत मान का चेक रिपब्लिक और नीदरलैंड्स का प्रस्तावित आधिकारिक दौरा रद्द हो गया है। केंद्र सरकार की ओर से राजनीतिक क्लीयरेंस पर कोई अंतिम निर्णय न आने के कारण यह दौरा स्थगित करना पड़ा। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री मान अगले महीने आयोजित होने वाले इन्वेस्टर्स समिट से पहले विदेशों में निवेश आकर्षित करने की रणनीति के तहत इस यात्रा पर जाने वाले थे।
तीसरी बार क्लीयरेंस नही मिला
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री को विदेश यात्रा के लिए मंजूरी नहीं मिल पाई। इससे पहले जनवरी में यूनाइटेड किंगडम और इज़राइल के प्रस्तावित दौरे के लिए भी अनुमति नहीं मिली थी। वहीं, पेरिस ओलंपिक्स के दौरान फ्रांस जाने का अनुरोध भी अस्वीकार कर दिया गया था। लगातार तीसरी बार क्लीयरेंस न मिलने से राजनीतिक हलकों में कई सवाल उठ रहे हैं।
स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री को आधिकारिक विदेश यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है। हालांकि मंत्रालय आमतौर पर क्लीयरेंस देने या न देने के कारण सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन इस मामले में बार-बार इनकार ने बहस को जन्म दे दिया है।
आम आदमी पार्टी ने इस फैसले पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष शासित राज्यों के साथ राजनीतिक भेदभाव किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस तरह के निर्णय पंजाब जैसे राज्यों की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और निवेश संभावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
पार्टी नेताओं का कहना है कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री पूर्व में विदेश यात्राएं कर चुके हैं, ऐसे में केवल पंजाब के मामले में बार-बार क्लीयरेंस रोके जाने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल इस मुद्दे ने केंद्र और राज्य सरकार के संबंधों को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस पर क्या रुख सामने आता है।
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