दिवाली को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को छोटी दीवाली का त्योहार मनाया जाएगा। दीवाली के एक दिन पहले होने की वजह से इसे छोटी दीवाली कहा जाता है। इस बार रविवार, 19 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन लोग अका/ल मृ/त्यु से मुक्ति पाने के लिए यम के नाम का दीपक जलाते हैं। आज के दिन हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। जिसमें घर के बाहर दक्षिण दिशा में ‘यम दीपक’ जलाया जाता है जिससे परिवार में अका/ल मृ/त्यु का भ/य समाप्त होता है और सभी पापों का ना/श होता है। इसलिए, यह दिन दिवाली की बड़ी तैयारी और घर-परिवार की आंतरिक व बाहरी शुद्धि का प्रतीक है।
यम का दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त और महत्व?
छोटी दिवाली के दिन श्री कृष्ण, काली मां और यमराज की पूजा का विधान है।
हालांकि, यमराज की पूजा सीधे तौर पर न होकर उनके नाम का दीपक जलाने के रूप में होती है मगर,
श्री कृष्ण और मां काली की पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 41 मिनट से रात 12 बजकर 31 मिनट तक है।
श्री कृष्ण ने नरक चतुर्दशी के दिन नरकासुर का व/ध किया था और यह जीत बु/रा/ई के अंत को दर्शाती है। वहीं, इस दिन को काली चौदस भी कहा जाता है जिसमें मां काली की पूजा कर भक्तों को बुरी शक्तियों, तंत्र-मंत्र और नका/रात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा मिलती है।
छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान का बहुत महत्व है।
यह स्नान सूर्योदय से पहले करना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति के पाप और दुर्भाग्य दूर होते हैं,
नरक के भय से मुक्ति मिलती है और उत्तम स्वास्थ्य एवं सौंदर्य की प्राप्ति होती है।
छोटी दिवाली पर यम का दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त 19 अक्टूबर 2025 की शाम को है।
नरक चतुर्दशी के दिन आप यम का दीपक शाम 6 बजकर 58 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 28 मिनट तक के बीच में जला सकते हैं।
यह समय यमराज प्रसन्न मुद्रा में विराजमान होंगे।
छोटी दिवाली की शाम को घर के मुख्य द्वार पर यम का दीपक जलाना एक बहुत ही महत्वपूर्ण रस्म है।
यह दीपक विशेष रूप से मृ/त्यु के देवता यमराज के लिए जलाया जाता है और इसे हमेशा घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है।

छोटी दीपावली क्यों मनाई जाती है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके 16,000 महिलाओं को मुक्त कराया।
इस विजय के बाद ब्रह्मांड में शांति स्थापित हुई। छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है, इसी दिन मनाई जाती है।
छोटी दिवाली 2025 महत्व
नरक चतुर्दशी की पूजा पा/पों और बुरे क/र्मों के प्रभाव से मुक्त करती है और उसे नरक में जाने के भय से छुटकारा दिलाती है।
इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के व/ध का स्मरण करने से जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मकता और बुराइयां दूर होती हैं।
द्रिक पंचांग के अनुसार, 19 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 13 मिनट के बाद आप किसी भी समय पूजा कर सकते हैं.
मान्यता है इस दिन सूर्योदय से पहले उबटन और तेल स्नान से ग्रह दोष शांत होते है।
माना जाता है इस दिन घर को चारों कोनों में तिल के तेल का दीप जलाने से शनि केतु से जुड़ी सम/स्या/एं दूर होती है।
इस दिन को दीपावली से पहले मनाने की परंपरा से बहुत महत्व है सभी बड़ी खुशी से इसको उत्साह के साथ मनाते है।
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