हिंदू धर्म के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय मुहिम, चंडीगढ़ से हुई शुरुआत!

चंडीगढ़, 5 जुलाई: हिंदू धर्म की जड़ों को मजबूती देने और भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से श्री हिंदू तख्त ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण संवाद का आयोजन किया। इस गरिमामयी मंच पर जगद्गुरु स्वामी श्री श्री 1008 विकास दास जी महाराज को आधिकारिक रूप से हिंदू तख्त के धर्माधीश पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इस अवसर पर मंच पर मौजूद थे—धर्माधीश स्वामी शरभानंद भैरव, राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनीर शर्मा, राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक तिवारी, चेयरमैन सुरिंदर मन्हास, राष्ट्रीय प्रचारक अमित शर्मा, चंडीगढ़ प्रदेश अध्यक्ष मनीष दुबे, और अनेक अन्य श्रद्धालु और कार्यकर्ता।

“धर्म जब तक जीवित रहता है, जब तक उसकी सांसें अगली पीढ़ी में चलती हैं”: स्वामी विकास दास जी

अपने प्रथम आधिकारिक संबोधन में स्वामी विकास दास जी ने भावुक शब्दों में कहा:

“हिंदू धर्म केवल एक पूजा पद्धति नहीं, यह जीवन जीने की कला है — जिसमें प्रकृति से प्रेम, समाज के साथ संतुलन और आत्मा की शुद्धता निहित है। यह धर्म शांति सिखाता है, संघर्ष नहीं। यह किसी के विरोध में नहीं, बल्कि आत्म-ज्ञान के पक्ष में खड़ा होता है।”

उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज की युवा पीढ़ी धीरे-धीरे अपने संस्कारों और जड़ों से कटती जा रही है, और यह केवल एक पीढ़ी का संकट नहीं, बल्कि संस्कृति के अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है।

“पश्चिमी चकाचौंध में छिपते भारतीय मूल्य” — चिंता का विषय

हिंदू तख़्त के राष्ट्रीय प्रधान सुनीर शर्मा और प्रवक्ता अशोक तिवारी ने जोर देकर कहा कि आज अंग्रेज़ी माध्यम की शिक्षा और सोशल मीडिया की चमक-दमक में हमारी असली परंपराएँ दब रही हैं

“स्कूलों में सांता क्लॉज़ और हैलोवीन मनाया जाता है, लेकिन बच्चे नहीं जानते कि रक्षाबंधन, रामनवमी या नागपंचमी का अर्थ क्या है।”

“परिवार और लोक संस्कृति से कट रही पीढ़ियाँ” — एक चेतावनी

स्वामी शरभानंद भैरव ने कहा कि पहले दादा-दादी, नाना-नानी से बच्चों को लोककथाएँ, देवी-देवताओं की महिमा और तीर्थ स्थलों की जानकारी मिलती थी। पर आज के बच्चों को यह भी नहीं मालूम कि हिमाचल या उत्तराखंड में कौन से लोकदेवता पूजे जाते हैं। यह सांस्कृतिक कटाव हमारी आत्मा से हमारी भाषा, भक्ति और भारत को अलग कर रहा है।

“सनातन परचम लहराना ही अब मिशन” — धर्म रक्षा का आह्वान

स्वामी विकास दास जी ने सभी कार्यकर्ताओं से स्पष्ट शब्दों में कहा:

“यह समय बातों का नहीं, कर्म का है। यदि हम आज नहीं जागे, तो कल हमारी संतानों को हिंदू कहलाने के लिए प्रमाण देने पड़ेंगे। इसलिए धर्मांतरण की चालों को रोकना, मंदिरों को सशक्त बनाना, वेदों का प्रचार और सनातन विचारों का प्रचार-प्रसार करना — यही हमारा कर्तव्य है।”

उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म को नुकसान पहुँचाने वालों को अब मुँहतोड़ जवाब मिलेगा, लेकिन वह जवाब हिंसा नहीं, ज्ञान और दृढ़ संकल्प के रूप में होगा।

धर्म के नाम पर स्वार्थ करने वालों को चेतावनी

समारोह के अंत में तख़्त के वरिष्ठ पदाधिकारियों — सुनीर शर्मा, अशोक तिवारी, सुरिंदर मन्हास, अमित शर्मा, और मनीष दुबे — ने दो टूक कहा कि:

“जो लोग श्री हिंदू तख्त का नाम लेकर व्यक्तिगत लाभ या राजनीति कर रहे हैं, उन्हें तुरंत यह बंद करना होगा। धर्म कोई ब्रांड नहीं, यह तपस्या का क्षेत्र है। और हम इसे किसी भी कीमत पर अपवित्र नहीं होने देंगे।”