चंडीगढ़: वरिष्ठ पशु कल्याण कार्यकर्ताओं, कानूनी विशेषज्ञों और सामुदायिक पशु देखभालकर्ताओं ने मंगलवार को चंडीगढ़ में एक प्रभावशाली प्रेस वार्ता कर चंडीगढ़ नगर निगम (एमसी) पर आवारा व सामुदायिक कुत्तों के साथ लगातार क्रू/रता और अ/वैध कार्रवाइयों के गंभीर आ/रोप लगाए।
प्रेस वार्ता को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता सिद्धार्थ अरोड़ा, अंतरराष्ट्रीय पशु अधिकार संगठन से जुड़ी वरिष्ठ नीति विशेषज्ञ दीक्षा भलाइक, पशु कल्याण कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता हर्ष गुप्ता तथा एसपीसीए की वरिष्ठ स्वयंसेवक और पशु देखभालकर्ता श्रीमती खारी ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने आ/रोप लगाया कि शहर के शैक्षणिक संस्थानों व अन्य परिसरों से कुत्तों को पकड़ने के हालिया आदेश माननीय सुप्रीम कोर्ट के 7 नवंबर के अंतरिम आदेश और एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियम, 2023 का खुला उल्लंघन हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन के पास अभी तक कोई कानूनी रूप से अधिसूचित शेल्टर मौजूद नहीं है।
अधिवक्ता सिद्धार्थ अरोड़ा ने कहा कि एसपीसीए का अ/वैध रूप से उपयोग उन कुत्तों को रखने के लिए किया जा रहा है, जिन्हें कथित और अप्रमाणित डॉग-बाइट मामलों में पकड़ा जाता है, जबकि एसपीसीए का उद्देश्य बीमार और घायल पशुओं का उपचार होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एसपीसीए की स्थिति अत्यंत दयनीय है, जहां लगभग 80 प्रतिशत मृत्यु दर और गं/भीर चिकित्सकीय लापरवाही सामने आ रही है।
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