भारत बना ब्रिटेन का भरोसेमंद रक्षा सहयोगी: 37 दिन बाद उड़ान भरता F-35B जेट बना दोस्ती की मिसाल!

चंडीगढ़, 22 जुलाई: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच गहराते रक्षा संबंधों की एक अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायक मिसाल हाल ही में सामने आई है। ब्रिटिश रॉयल नेवी का अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट F-35B Lightning II, जो कि दुनिया की सबसे उन्नत मल्टीरोल लड़ाकू विमानों में से एक है, आखिरकार 37 दिन बाद भारत के तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अपने बेस की ओर सफलतापूर्वक रवाना हो गया।

इस पूरी तकनीकी सहायता और सहयोग की प्रक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत न केवल सैन्य अभ्यास में, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में भी एक भरोसेमंद, कुशल और विश्वसनीय रक्षा भागीदार के रूप में उभरा है।

 कैसे शुरू हुआ यह असाधारण सफर?

14 जून को भारतीय समुद्री सीमा के पास HMS प्रिंस ऑफ वेल्स एयरक्राफ्ट कैरियर से एक संयुक्त अभ्यास के दौरान, ब्रिटिश रॉयल नेवी का F-35B फाइटर जेट एक गंभीर तकनीकी परेशानी में फंस गया। खराब मौसम और सीमित ईंधन के चलते, इस हाई-टेक विमान को मजबूरन तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी।

हालांकि लैंडिंग सुरक्षित रही, लेकिन इसके हाइड्रॉलिक सिस्टम और ऑक्सिलियरी पावर यूनिट (APU) में बड़ी खराबी आ गई, जिससे यह जमीन पर ही अटक गया।

 जब तीन इंजीनियर काफी नहीं हुए, भारत ने खोला सहयोग का द्वार

HMS प्रिंस ऑफ वेल्स से पहुंचे तीन ब्रिटिश इंजीनियरों ने पहले तो स्थानीय स्तर पर मरम्मत की कोशिश की, लेकिन तकनीकी दिक्कतें इतनी गहरी थीं कि मामला उनके बस से बाहर था। ऐसे में यूके ने एक बड़ा कदम उठाया – 6 जुलाई को RAF A400M एटलस विमान से 25 विशेषज्ञ इंजीनियरों की एक विशेष टीम भारत भेजी गई।

इन विशेषज्ञों ने एयर इंडिया के MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) हैंगर में दिन-रात मेहनत शुरू की। स्टील्थ तकनीक की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हैंगर को पूरी तरह से सील किया गया। बाहर CISF (सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स) ने सुरक्षा का जिम्मा संभाला और अंदर ब्रिटिश सैन्य दल की कड़ी निगरानी रही।

 भारतीय वायुसेना की अहम भूमिका

भारतीय वायुसेना ने भी इस जटिल ऑपरेशन में अपनी विशेषज्ञता का योगदान दिया। IACCS (Integrated Air Command and Control System) के माध्यम से ऑपरेशन की निगरानी और तकनीकी सहायता दी गई। भारतीय टीमों ने बिना किसी देरी के हर उस जरूरत को पूरा किया, जो ब्रिटिश इंजीनियरों को जेट की मरम्मत के दौरान महसूस हुई।

 37 दिन बाद सफलता की उड़ान

लगातार 37 दिनों की कड़ी मेहनत और तकनीकी निपुणता के बाद, F-35B का हाइड्रॉलिक सिस्टम और APU पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया गया। मरम्मत पूरी होने के बाद जेट ने सफल परीक्षण उड़ान ली, और फिर HMS प्रिंस ऑफ वेल्स कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की ओर लौट गया।

 “भारत धन्यवाद”: ब्रिटेन का भावुक संदेश

जैसे ही जेट ने उड़ान भरी, ब्रिटेन की तरफ से आधिकारिक तौर पर भारतीय वायुसेना, तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट प्रबंधन और एयर इंडिया MRO टीम को धन्यवाद कहा गया। ब्रिटिश अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा कि यह अनुभव भारत-यूके रक्षा साझेदारी को और गहराई देता है और यह साबित करता है कि भारत संकट के समय में एक ‘डिपेंडेबल डिफेंस पार्टनर’ है।

 क्यों है यह घटना खास?

  • यह पहला मौका था जब किसी विदेशी स्टील्थ फाइटर जेट की इतनी लंबी और संवेदनशील मरम्मत भारत में की गई।

  • भारत की इंजीनियरिंग, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स क्षमता ने विश्व मंच पर अपनी साख फिर एक बार मजबूत की।

  • भारतीय एजेंसियों और निजी संस्थानों के बीच सामंजस्य का यह उदाहरण भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता अभियान को भी प्रोत्साहित करता है।