चंडीगढ़, 3 जुलाई: भारतीय जनता पार्टी (BJP) में लंबे समय से चले आ रहे अटकलों और चर्चाओं के बीच अब राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर तस्वीर साफ़ होने की ओर बढ़ रही है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 में समाप्त हो चुका है, और वह फिलहाल एक्सटेंशन पर हैं। लेकिन अब खबर है कि 21 जुलाई 2025 से पहले — मानसून सत्र के आरंभ से पहले — पार्टी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम सार्वजनिक कर सकती है।
यह अध्यक्ष पद का चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था कि किसी अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म हो जाने के इतने लंबे समय तक उत्तराधिकारी तय न हो। अब जब लगभग सभी संगठनात्मक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, पार्टी का ध्यान नए नेतृत्व पर केंद्रित है।
नए अध्यक्ष के सामने होंगी बड़ी राजनीतिक चुनौतियां
भविष्य में भाजपा को कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनावों का सामना करना है — जैसे कि:
-
2025: बिहार विधानसभा चुनाव
-
2026: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम
-
2027: उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, महाराष्ट्र आदि
-
साथ ही: राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव
इन सभी चुनावों में भाजपा की साख और रणनीति नए अध्यक्ष के कंधों पर टिकी होगी। ऐसे में पार्टी के सामने ऐसा नेता चुनने की चुनौती है जो संगठन के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों में प्रभावी नेतृत्व दे सके।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए प्रमुख दावेदार
🔸 1. शिवराज सिंह चौहान – मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री
-
अनुभव: चार बार मुख्यमंत्री, पार्टी में मजबूत पकड़
-
वर्गीय समीकरण: OBC चेहरा
-
RSS से संबंध: गहरा जुड़ाव
-
मजबूती: संतुलित, स्वीकार्य चेहरा; संगठन और सरकार दोनों में अनुभव
🔸 2. सुनील बंसल – भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव
-
भूमिका: यूपी में भाजपा की चुनावी जीत के प्रमुख रणनीतिकार
-
संगठनिक पकड़: युवा कार्यकर्ताओं में प्रभावशाली
-
चुनौती: अभी मैदान में अपेक्षाकृत नया चेहरा, लेकिन भीतरखाने मजबूत समर्थन
🔸 3. धर्मेंद्र प्रधान – केंद्रीय मंत्री, ओडिशा
-
छवि: नीति-निर्माण और रणनीति में दक्ष
-
राजनीतिक समीकरण: ओडिशा जैसे राज्य से, जहां भाजपा विस्तार चाहती है
-
RSS से संबंध: मज़बूत रिश्ते
-
फायदा: दक्षिण-पूर्व भारत में पार्टी विस्तार के लिहाज से अहम
🔸 4. मनोहर लाल खट्टर – हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान केंद्रीय मंत्री
-
विशेषता: संगठन के पुराने और विश्वसनीय चेहरे
-
सादगी और संघनिष्ठा: RSS से दीर्घकालीन संबंध
-
अनुभव: मुख्यमंत्री के रूप में दो बार कार्यभार संभाला, दिल्ली के करीब राजनीतिक पकड़
दक्षिण भारत से भी सामने आए अहम नाम
BJP अब राष्ट्रीय संतुलन के तहत दक्षिण भारत से भी चेहरा देने पर विचार कर रही है। संभावित नामों में शामिल हैं:
-
डी. पुरंदेश्वरी (आंध्र प्रदेश) – पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की आंध्र प्रदेश इकाई की प्रमुख
-
तमिलिसाई सौंदर्यराजन (तेलंगाना के पूर्व राज्यपाल) – मजबूत भाषण क्षमता और तमिलनाडु में अच्छी पकड़
-
वानति श्रीनिवासन (तमिलनाडु) – भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, दक्षिण भारत में पार्टी की साख बढ़ाने में सक्रिय
यदि पार्टी दक्षिण से नेतृत्व चुनती है, तो यह साफ संदेश होगा कि बीजेपी अपने विस्तारवादी एजेंडे के तहत नए क्षेत्रों पर फोकस कर रही है।
चुनाव प्रक्रिया कैसी है?
भाजपा के संविधान के अनुसार:
-
उम्मीदवार को कम से कम 15 वर्षों से पार्टी का सक्रिय सदस्य होना चाहिए।
-
चुनाव राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश प्रतिनिधियों द्वारा निर्वाचक मंडल में किया जाता है।
-
किसी उम्मीदवार के नामांकन के लिए 20 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है।
-
इससे पहले, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन चुनावों का पूरा होना अनिवार्य होता है।
-
देश भर में 36 राज्यों में चुनावी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है या अंतिम चरण में है।
Top Tags