होली से पहले BJP को मिलेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, दक्षिण भारत से आ सकता है बड़ा चेहरा!

मुख्य बिंदु:  दक्षिण भारत से अध्यक्ष बनने की बढ़ी संभावना, दौड़ में जी. किशन रेड्डी, बंडी संजय कुमार और प्रल्हाद जोशी
•पार्टी का दक्षिण भारत में बढ़ता जनाधार बना बड़ी वजह
•होली के बाद हो सकता है नए अध्यक्ष की घोषणा**

चंडीगढ़, 25 फरवरी: भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जल्द ही नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने जा रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूती देने के लिए नए अध्यक्ष की घोषणा होली के बाद संभव मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार अध्यक्ष पद के लिए दक्षिण भारत से किसी नेता को मौका दिया जा सकता है।

दक्षिण भारत से अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना
BJP के संगठन में पिछले 20 वर्षों से उत्तर भारतीय नेता ही शीर्ष पद संभालते आए हैं, लेकिन इस बार पार्टी दक्षिण भारत में अपने बढ़ते जनाधार को देखते हुए वहां से किसी वरिष्ठ नेता को अध्यक्ष बना सकती है। इस दौड़ में तीन नाम सबसे आगे हैं – जी. किशन रेड्डी, बंडी संजय कुमार और प्रल्हाद जोशी।
अध्यक्ष पद की रेस में सबसे आगे ये तीन नाम
1. जी. किशन रेड्डी (64 वर्ष, तेलंगाना)
•वर्तमान में तेलंगाना BJP अध्यक्ष और केंद्रीय कोयला मंत्री।
•ओबीसी समुदाय से आते हैं, संगठन और सरकार दोनों का अनुभव।
•पूर्व में BJYM के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं।
•PM मोदी के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।
2. बंडी संजय कुमार (53 वर्ष, तेलंगाना)
•हिंदुत्व और ओबीसी दोनों समीकरण साधने वाले नेता।
•वर्तमान में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और BJP के राष्ट्रीय महासचिव।
•तेलंगाना के करीमनगर से सांसद और राज्य के पूर्व BJP अध्यक्ष।
•संघ से जुड़ाव, ABVP में भी अहम भूमिका निभाई।
3. प्रल्हाद जोशी (62 वर्ष, कर्नाटक)
•सरकार और संगठन में लंबा अनुभव, संसदीय मामलों के जानकार।
•कर्नाटक के पूर्व BJP अध्यक्ष और धारवाड़ से लगातार 5 बार सांसद।
•मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में संसदीय कार्य मंत्री रह चुके हैं।
•लो-प्रोफाइल और विवादों से दूर रहने वाले नेता।
होली के बाद मिल सकता है नया अध्यक्ष
BJP के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है जब आधे से अधिक राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो जाएं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में यह प्रक्रिया मार्च के पहले सप्ताह तक पूरी होने की उम्मीद है। ऐसे में होली के बाद पार्टी के नए अध्यक्ष की घोषणा की जा सकती है।
BJP में अब तक 11 राष्ट्रीय अध्यक्ष
1980 में BJP के गठन के बाद से अब तक 11 नेताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली है। इन सभी नेताओं ने पार्टी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
अध्यक्ष                                           कार्यकाल
अटल बिहारी वाजपेयी                   1980-1986
लाल कृष्ण आडवाणी                     1986-1990, 1993-1998, 2004-2005
डॉ. मुरली मनोहर जोशी                 1991-1993
कुशाभाऊ ठाकरे                           1998-2000
बंगारू लक्ष्मण                               2000-2001
जना कृष्णमूर्ति                               2001-2002
वेंकैया नायडू                                 2002-2004
राजनाथ सिंह                                 2005-2009, 2013-2014
नितिन गडकरी                              2010-2013
अमित शाह                                   2014-2020
जेपी नड्डा                                      2020-वर्तमान
BJP का दक्षिण भारत में बढ़ता प्रभाव
BJP के रणनीतिकार मानते हैं कि यदि दक्षिण भारत से अध्यक्ष चुना जाता है, तो पार्टी को 2029 के आम चुनावों में और मजबूत आधार मिल सकता है। लोकसभा चुनावों में पिछले एक दशक में BJP का वोट शेयर दक्षिण भारतीय राज्यों में लगातार बढ़ा है।
राज्य                    2014          2019           2024 (अनुमानित)
केरल                   10.33%     12.93%        16.67%
आंध्र प्रदेश            7.18%       0.98%         13.07%
कर्नाटक               43.37%     51.38%       46.05%
तमिलनाडु            5.56%        3.66%         10.72%
तेलंगाना                10.37%     19.45%        35.06%
दक्षिण भारत से अध्यक्ष बनने के फायदे
•BJP के लिए नए वोट बैंक का विस्तार होगा।
•कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के गढ़ में सेंध लगाने में मदद मिलेगी।
•2029 लोकसभा चुनावों की रणनीति को मजबूती मिलेगी।
BJP के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अटकलें तेज
BJP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर अंतिम चर्चा होने की संभावना है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और RSS के मार्गदर्शन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। लेकिन यह लगभग तय माना जा रहा है कि होली के बाद BJP को नया अध्यक्ष मिल सकता है, और इस बार दक्षिण भारत से किसी बड़े नेता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।