बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा कदम: 5 लाख महिलाओं को बांटे जाएंगे सैनिटरी पैड, राहुल गांधी की तस्वीर के साथ!

चंडीगढ़, 4 जुलाई: बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी जोरों पर है और इस बार राजनीतिक दलों का फोकस महिलाओं पर केंद्रित होता दिख रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी ने एक नई रणनीति का ऐलान किया है, जिसके तहत वह राज्य की 5 लाख महिलाओं को मुफ्त सैनिटरी पैड बांटेगी।

पार्टी ने इस पहल को ‘माई-बहन मान योजना’ का नाम दिया है। पैड के पैकेट पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तस्वीर और “जरूरतमंद महिलाओं को सम्मान राशि – ₹2500 प्रति माह” का वादा भी छपा होगा, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस महिलाओं के लिए न्यूनतम वित्तीय सहायता योजना का प्रस्ताव चुनावी वादे के रूप में पेश कर सकती है।

महिलाओं पर केंद्रित कैंपेन की शुरुआत

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में इस योजना की घोषणा करते हुए कहा:

“हम महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान को सर्वोपरि मानते हैं। यह सिर्फ एक वितरण अभियान नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान भी होगा।”

राजेश राम ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “बिहार की महिलाएं आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं,” और कांग्रेस का यह प्रयास “सम्मान और सुविधा का प्रतीक” बनेगा।

क्या है ‘माई-बहन मान योजना’?

  • 5 लाख महिलाओं को मुफ्त सैनिटरी पैड दिए जाएंगे

  • पैड पर राहुल गांधी की तस्वीर और कांग्रेस की महिला नीति का संकेत

  • ‘अखिल भारतीय महिला कांग्रेस’ इस कार्यक्रम को चलाएगी

  • हर डब्बे पर ₹2500 प्रति माह सहायता का वादा भी अंकित

  • स्वास्थ्य जागरूकता शिविर और महिला संवाद सत्र भी होंगे

राजनीतिक प्रतिक्रिया: बीजेपी का विरोध

कांग्रेस की इस पहल पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
बीजेपी प्रवक्ता रमेश भंडारी ने कहा:

“सैनिटरी पैड जैसे संवेदनशील उत्पाद पर राहुल गांधी की तस्वीर लगाना महिलाओं का अपमान है। यह कांग्रेस की घटिया राजनीति का उदाहरण है।”

भंडारी ने इसे “वोट बैंक की राजनीति का नया निम्न स्तर” करार देते हुए दावा किया कि “बिहार की महिलाएं इस राजनीतिक पाखंड को समझती हैं और इसका जवाब वोट से देंगी।”

राजनीतिक विश्लेषण: महिला मतदाताओं पर सीधा प्रभाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस की यह पहल राज्य में महिला मतदाताओं को साधने की कोशिश है, जो बिहार की कुल मतदाता आबादी का लगभग 48% हैं।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. उर्वी त्रिपाठी के अनुसार:

“यह कदम सिर्फ एक स्वास्थ्य सुविधा नहीं, बल्कि भावनात्मक और राजनीतिक संदेश भी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य दलों की प्रतिक्रिया क्या रहती है।”