चंडीगढ़, 23 जुलाई: भारत और चीन के रिश्तों में हाल के वर्षों में जो ठहराव आ गया था, अब उसमें धीरे-धीरे सुधार की झलक दिखने लगी है। इस दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम तब सामने आया जब भारत ने लगभग पाँच साल बाद चीनी पर्यटकों के लिए वीजा सेवाएं बहाल कर दीं। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि 24 जुलाई 2025 से चीनी नागरिक एक बार फिर पर्यटक वीजा के लिए आवेदन कर सकेंगे।
पिछले पाँच साल में क्या हुआ था?
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2020: कोविड-19 महामारी के कारण भारत ने सभी विदेशी पर्यटक वीजा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था।
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2020 जून: इसके तुरंत बाद गलवान घाटी में भारत-चीन सैन्य झड़प हुई, जिसमें दोनों देशों के सैनिकों की जान गई। इसके चलते द्विपक्षीय संबंध और तनावपूर्ण हो गए।
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उसके बाद भारत ने न केवल वीजा पर रोक जारी रखी, बल्कि ऐप्स प्रतिबंध से लेकर व्यापारिक समीक्षा तक कई क्षेत्रों में कठोर रुख अपनाया।
अब क्या बदला है? – रिश्तों में आ रहा नरमापन
हाल ही में भारत और चीन के बीच कई सकारात्मक संकेत सामने आए:
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पूर्वी लद्दाख में सैन्य तनाव वाले इलाकों से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटीं, जो विश्वास बहाली की दिशा में बड़ा कदम था।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कज़ान में मुलाकात हुई, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई।
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कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और सीधी उड़ानों को बहाल करने पर भी चर्चा हुई।
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बयान दिया कि “भारत-चीन संबंध अब सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं, लेकिन पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा।”
चीनी पर्यटकों के लिए वीजा प्रक्रिया कैसे होगी?
भारतीय दूतावास ने बताया कि इच्छुक चीनी नागरिक:
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ऑनलाइन वीज़ा फॉर्म भर सकते हैं
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अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं
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फिर अपना पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज बीजिंग, शंघाई और ग्वांगझू स्थित वीज़ा केंद्रों में जमा कर सकते हैं।
बीते वर्षों में भले ही चीन ने भारतीय छात्रों और कारोबारियों के लिए वीजा सेवाएं शुरू कर दी थीं, लेकिन आम पर्यटकों की आवाजाही पर अब तक रोक बनी हुई थी। अब यह रुकावट हटने से दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क और विश्वास में इजाफा होगा।
पर्यटन के जरिये कूटनीति का विस्तार
भारत की ओर से यह फैसला केवल पर्यटकों को अनुमति देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक कूटनीतिक संकेत भी है कि दोनों देश सहजता और संवाद के रास्ते पर लौटना चाहते हैं।
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पर्यटन के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ेगा
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व्यापार, शिक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भरोसा और स्थिरता आएगी
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दोनों देशों के नागरिकों के बीच सीधे अनुभव और समझ विकसित होगी
भारत-चीन रिश्तों के लिए आगे क्या?
हालांकि यह निर्णय एक सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि:
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सीमाओं पर स्थायी समाधान जरूरी है
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साइबर, व्यापार और रणनीतिक क्षेत्रों में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखना होगा
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राजनीतिक नेतृत्व को परस्पर सम्मान और भरोसे के साथ आगे बढ़ना होगा
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