हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष माह का प्रमुख पर्व श्रीकालभैरव अष्टमी है. आज काल भैरव जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. इस भैरव अष्टमी को भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप भैरव जी के प्रकट होने का दिन माना जाता है. इस दिन भक्त भैरव जी की उपासना कर भ/य, संक/ट और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना करते हैं. ज्योतिषियों के अनुसार, इस मार्गशीर्ष के महीने में भगवान काल भैरव की विशेष विशेष पूजा का विधान बताया गया है. इसलिए, इसे भैरव अष्टमी और कालाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है.
भगवान काल भैरव की कैसे करें पूजा?
भगवान भैरव की पूजा का पुण्यफल पाने के लिए किसी भैरव मंदिर में जाकर या फिर अपने घर में उनके चित्र पर गंगाजल छिड़कने के बाद फल-फूल, धूप-दीप, वस्त्र-भोग आदि अर्पित् करना चाहिए. भगवान भैरव को उनकी प्रिय चीज यानि इमरती या जलेबी जरूर चढ़ाएं क्योकि यह उरद से बनी होती है. इसके बाद भगवान भैरव की चालीसा और भैरव अष्टकं पाठ करना चाहिए. पूजा के अंत में भगवान भैरव की श्रद्धापूर्वक आरती करना चाहिए.

ॐ श्री भैरवाय नमः‘ मन्त्र का जप करें
ॐ श्री भैरवाय नमः’ मन्त्र का जप करना चाहिए. इसके साथ ही तीन बार अर्घ्य भी देना चाहिए।
पौराणिक मान्यता है कि जिस दिन देवाधिदेव महादेव कालभैरव के रूप में अवतरित हुए थे, उस दिन मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी. इसलिए इस दिन कालभैरव अष्टमी का पर्व मनाया जाता है. कालभैरव को साक्षात भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है. भगवान शिव के दो स्वरूप हैं- पहला स्वरूप भक्तों को अभय प्रदान करने वाले विश्वेश्वर के रूप में तथा दूसरा स्वरूप दण्ड देने वाले कालभैरव के रूप में, जो समस्त दुष्टों का संहार करते हैं.
भैरव जी भगवान शिव का रौ/द्र रूप
मान्यताओं के अनुसार, शिव की तंत्र साधना में भैरव का विशेष महत्व है. वैसे तो भैरव जी भगवान शिव का रौ/द्र रूप है, लेकिन कहीं कहीं पर इनको शिव का पुत्र भी माना जाता है. इसके अलावा मान्यता ऐसी भी है कि जो कोई भी शिव जी के मार्ग पर चलता है उसे भी भैरव कहा जाता है. साथ ही, इनकी पूजा करने से शनि और राहु की बाधाओं से भी मुक्ति मिलती

कैसे करें भगवान काल भैरव की उपासना?
काल भैरव जयंती के दिन संध्याकाल में भैरव जी की पूजा की जाती है. इनके सामने एक बड़े से दीपक में सरसों के तेल का दीपक जलाएं. फिर, उड़द की बनी हुई या दूध की बनी हुई वस्तुएं प्रसाद के रूप में दें. प्रसाद अर्पित करने के बाद भैरव जी के मंत्रों का जाप करें.
भगवान काल भैरव की पूजा से होते लाभ
काल भैरव की साधना व्यक्ति को कलयुग के कष्टों से बचाने वाली मानी गई है. मान्यता के अनुसार भगवान काल की पूजा करने पर जीवन से जुड़े सारे भय सं/कट दूर हो जाते हैं और साधक को अपने शत्रु/ओं पर विजय प्राप्त होती है. मान्यता है कि पूरे विधि-विधान से काल भैरव जी की पूजा करने से व्यक्ति को राहु और शनि जैसे ग्रह का कोई दोष नहीं लगता है और वह सुखी और निर्भय जीवन जीता है.
Top Tags