कल भाई दूज! भाई-बहन के स्नेह का पर्व जानें पूजा विधि और महत्व

भाई दूज का पर्व बहन और भाई के प्रति विश्वास और प्रेम का होता है. हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भाई दूज के पर्व मनाया जाता है

दिपावली के पांच दिवसीय उत्सव के दौरान भाई दूज का त्योहार आखिरी दिन मनाया जाता है।

हिंदू धर्म में इस पर्व का बड़ा महत्व है। इस दिन बहनें अपने भाई के लिए पूजा करती है और भगवान से उनके लिए प्रार्थना करती है.

बहनें अपने भाई का तिलक करके उनकी लंबी उम्र, सुख समृद्धी और जीवन में खुशहाली की कामना करती है।

इसके साथ ही भाई अपनी तरफ से बहनों को उपहार देकर उनके प्रति अपनी स्नेह और जीवन रक्षा का वचन देते है

इस वर्ष भाई दूज 23अक्टूबर को यानी कल गुरुवार को मनाया  जाएगा।

भाई दूज कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है.

22 अक्टूबर बुधवार को भाई दूज की तिथि रात 8 बजकर16 मिनट पर शुरु होगी और 23 अक्टूबर के रात 10 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी।

 

भाई दूज 2025 पूजन विधि

 

भाई दूज के दिन बहनें सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें. पूजा स्थल पर चौकी बिछाकर भगवान गणेश और चित्रगुप्त की पूजा करें. इसके बाद बहनें अपने भाई को हल्दी, चावल और रोली से तिलक करें और भाई के हाथ में कलावा बाँधें। इसके बाद भाई को मिठाई खिलाएं। फिर भाई की आरती करें, साथ ही भाई बहन के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा है। भाई बहन को उपहार देता है और जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देते है. इस दिन भाई-बहन के प्रेम और आशीर्वाद का विशेष महत्व होता है.

 

 

यम द्वितीया का महत्व

भाई दूज को ‘यम द्वितीया’ भी कहा जाता है क्योंकि इसका संबंध यमराज और उनकी बहन यमुनाजी की कथा से जुड़ा है. मान्यता है कि यमराज अपनी बहन के घर उनके स्नेह और सम्मान का आदर करने गए थे. यमुनाजी ने उन्हें तिलक किया, आरती उतारी और भोजन कराकर अपना प्रेम और सेवा दिखाया. इस पर यमराज ने वचन दिया कि जो भाई अपनी बहन को इस दिन बुलाकर तिलक और भोजन कराएगा, उसकी बहन हमेशा सुरक्षित, सुखी और समृद्ध रहेगी.

रक्षाबंधन और भाई दूज दोनों भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार हैं, जो भाई-बहन के रिश्ते को और गहरा करने वाला एक खास त्योहार माना जाता है।