भारत के शुभांशु शुक्ला बनाएंगे अंतरिक्ष में इतिहास, मई 2025 में Axiom Mission 4 पर भरेंगे उड़ान !

चंडीगढ़, 3 अप्रैल: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरने वाले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बनने जा रहे हैं। यह यात्रा मई 2025 में शुरू होगी, जब वे Axiom Mission 4 (Ax-4) के तहत अंतरिक्ष में जाएंगे।

Axiom Mission 4 (Ax-4) का उद्देश्य:

Ax-4 मिशन एक 14-दिवसीय मानवयुक्त अंतरिक्ष यात्रा होगी, जिसका फोकस होगा:

  • वैज्ञानिक प्रयोग: माइक्रोग्रैविटी (Microgravity) वातावरण में किए जाने वाले विशेष प्रयोग।

  • शैक्षिक पहलें: अंतरिक्ष से जुड़े शिक्षा कार्यक्रम और ज्ञान का आदान-प्रदान।

  • व्यावसायिक गतिविधियां: अंतरिक्ष में व्यावसायिक परियोजनाओं और सहयोग की खोज।

इस मिशन के दौरान शुभांशु शुक्ला भारत की समृद्ध संस्कृति को अंतरिक्ष में प्रदर्शित करेंगे। वे विभिन्न भारतीय राज्यों की सांस्कृतिक कलाकृतियां अपने साथ ले जाएंगे और माइक्रोग्रैविटी वातावरण में योग करने का प्रयास भी करेंगे, जिससे भारत की पारंपरिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा।

शुभांशु शुक्ला का परिचय:

  • जन्म: 10 अक्टूबर 1985, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

  • सेवा: भारतीय वायुसेना के अनुभवी पायलट

  • उड़ान अनुभव: 2,000 घंटे से अधिक उड़ान समय

  • विमान: Su-30 MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar, Hawk, Dornier और An-32

  • पद: मार्च 2024 में ग्रुप कैप्टन के रूप में पदोन्नत

  • विशेष चयन: भारत के गगनयान मिशन के लिए भी चुने गए अंतरिक्ष यात्री

मिशन की प्रमुख जानकारी:

  • कमांडर: पेगी व्हिटसन (पूर्व NASA अंतरिक्ष यात्री और Axiom Space की मानव अंतरिक्ष उड़ान निदेशक)

  • पायलट: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे)

  • अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री:

    • स्लावोज़ उज़्नांस्की-विश्निव्स्की (पोलैंड, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी)

    • टिबोर कपु (हंगरी, HUNOR मिशन के सदस्य)

मिशन का महत्व:

Ax-4 मिशन न केवल भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, बल्कि यह भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान की वैश्विक पहचान को भी दर्शाता है। शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष में जाना भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक प्रगति की दिशा में एक अहम कदम है।

यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए भी एक गर्व का पल है, क्योंकि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा के नए द्वार खोलता है।