महंगी दवाइयों पर ट्रंप की चोट, अमेरिका में दवा होगी सस्ती!

चंडीगढ़, 12 मई: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक ऐतिहासिक घोषणा की, जो न केवल अमेरिका की हेल्थकेयर प्रणाली को झकझोर सकती है, बल्कि आम नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि वह एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, जिसके जरिए अमेरिका में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं और अन्य फार्मास्युटिकल उत्पादों की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी।

यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में हेल्थकेयर और मेडिकल खर्च एक बड़ा चुनावी और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। लाखों नागरिक हर महीने दवाइयों और इलाज पर भारी-भरकम खर्च झेल रहे हैं, और कई बार ज़रूरी दवाएं लेने से भी पीछे हटते हैं क्योंकि उनकी कीमत आम आदमी की पहुंच से बाहर होती है। ट्रंप की यह पहल, स्वास्थ्य प्रणाली की उस असमानता पर सीधा हमला करती है जो वर्षों से चली आ रही है।

ट्रंप का बड़ा सवाल: “एक ही दवा, अलग-अलग दाम क्यों?”

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि वर्षों से वे यह देख रहे हैं कि अमेरिका में दवाइयों की कीमतें अन्य देशों की तुलना में कई गुना ज्यादा हैं। उन्होंने एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल उठाया:

“एक ही दवा, जो एक ही लैब या फैक्ट्री में बनाई जाती है, वह अमेरिका में 5 से 10 गुना ज्यादा कीमत पर क्यों बेची जाती है?”

यह सवाल सिर्फ एक आलोचना नहीं है, बल्कि यह उस वैश्विक हेल्थ इंडस्ट्री पर एक गंभीर टिप्पणी है, जहां अमेरिका जैसे विकसित देश में भी आम नागरिक दवा के लिए संघर्ष कर रहा है।

फार्मा कंपनियों पर सीधा प्रहार

ट्रंप ने दवा कंपनियों को भी आड़े हाथों लिया और उन पर कीमतें बढ़ाने के लिए शोध और निर्माण लागत का बहाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने साफ किया कि अब वक्त आ गया है जब दवा उद्योग को जिम्मेदार बनाया जाए और दवाइयों की कीमतों पर नियंत्रण लगाया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यकारी आदेश के लागू होते ही दवा की कीमतों में तुरंत गिरावट देखी जाएगी।

क्या अमेरिका के इस फैसले का वैश्विक असर पड़ेगा?

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी इशारा किया कि अमेरिका में दवाओं को सस्ता करने की यह योजना पूरी दुनिया पर असर डाल सकती है। उनका मानना है कि अमेरिका में कीमतें गिरने से दवा कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर सकती हैं, जिससे बाकी देशों में दवाइयां महंगी हो सकती हैं। यह एक जटिल लेकिन संभावित सच्चाई है जो दुनिया भर की हेल्थकेयर नीतियों को प्रभावित कर सकती है।

चुनावी साल में ट्रंप की रणनीति?

ट्रंप का यह कदम राजनीतिक लिहाज से भी देखा जा रहा है। अमेरिका में आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए ट्रंप का यह फैसला मध्यम और निम्न आय वर्ग के मतदाताओं को साधने की कोशिश हो सकता है। अमेरिका की हेल्थकेयर व्यवस्था पर वर्षों से बहस हो रही है, लेकिन कोई भी सरकार दवा कंपनियों से टकराने का साहस नहीं दिखा पाई। अब ट्रंप ने यह जोखिम उठाया है और यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका असर चुनावी समीकरणों पर क्या पड़ता है।