10 नवंबर को दिल्ली रेड फोर्ट क्षेत्र में हुए कार ब्ला/स्ट की जांच में बड़ा एक्शन करते हुए ED ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को गिर/फ्तार कर लिया है. एजेंसी ने दिल्ली-NCR में अल फलाह ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के 25 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान जांच में मनी लॉन्ड्रिंग, शेल कंपनियों और संदि/ग्ध फंडिंग की भूमिका खंगाली जा रही है. अब तक NIA ने दो ऐसे लोगों को गिर/फ्तार किया है जिन्हें कथित तौर पर ‘सुसा/इड बॉम्ब/र’ डॉ. उमर नबी का करीबी माना जा रहा है. जांच एजेंसियों के अनुसार, धमा/के की साजिश में शामिल कुछ डॉक्टरों की भूमिका और कश्मीर कनेक्शन भी जांच के दायरे में है.
बतादें ED ने अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को मंगलवार को गिर/फ्तार किया है। उनकी गिर/फ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत की गई। ईडी की यह कार्रवाई ग्रुप से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर छापे/मारी के दौरान मिले अहम दस्तावेजों और प्रमाणों के आधार पर की गई है।
जवाद सिद्दीकी को रात घर से गिर/फ्तार
अल-फलह यूनिवर्सिटी से जुड़े बड़े घोटाले में ED ने चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिर/फ्तार करने के बाद कोर्ट से 13 दिन की कस्टडी हासिल कर ली है. ये कार्रवाई छात्रों को फर्जी मान्यता दिखाकर ठ/गने और करोड़ों की कमाई करने के आरोपों में हुई है. ED की टीम ने 18 नवंबर की देर रात लगभग 11 बजे जवाद सिद्दीकी को उनके घर से गिर/फ्तार किया था.
गिरफ्तारी की वजह और सभी दस्तावेज़ उनके वकील और उनकी पत्नी को दिए गए. ईडी ने ये गिर/फ्तारी PMLA की धारा 19 के तहत की है. दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 13 नवंबर को दो FIR दर्ज की थी, जिसमें आरोप था कि यूनिवर्सिटी ने फर्जी NAAC मान्यता दिखाई और खुद को UGC की धारा 12B में मान्यता प्राप्त बताया जबकि UGC ने साफ कहा था कि यूनिवर्सिटी को ये मान्यता कभी नहीं मिली.
छात्रों को गुमराह कर एडमिशन और फीस वसूलने के लिए किया गया
ED के मुताबिक ये सब छात्रों और उनके परिवारों को गुमराह कर एडमिशन और फीस वसूलने के लिए किया गया. इन आरोपों को आधार मानकर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की. ED ने दावा किया है कि यूनिवर्सिटी ने 415 करोड़ रुपये गलत तरीके से कमाए है।
रिमांड नोट में सामने आए बड़े खुलासे
रिमांड नोट में ईडी ने बताया कि अल फलाह यूनिवर्सिटी फर्जी और Fake Accreditation के आधार पर छात्रों को लगातार दाखिला दे रही थी और इससे भारी भरकम कमाई की जा रही थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इसी तरह के झूठे दावों और कथित अनि/यमितता/ओं के जरिए यूनिवर्सिटी ने अब तक 415 करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित की है। आईटीआर (आयकर रिटर्न) की पड़ताल के दौरान भी कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिनकी जांच जारी है।
Top Tags