पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों की स्थिति को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई ऐतिहासिक मंदिरों और गुरुद्वारों की संपत्तियों को या तो बेचा जा रहा है या उन पर कथित तौर पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। इसी क्रम में एबटाबाद स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस गुरुद्वारे की संपत्ति को एक सरकारी बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने कथित रूप से रिश्वत लेकर बेच दिया।
स्थानीय सिख नेताओं ने इस मामले में संबंधित अधिकारी की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और गुरुद्वारे को संरक्षित स्मारक घोषित किया जाए। आरोप यह भी लगाए गए हैं कि संबंधित बोर्ड धार्मिक संपत्तियों को किराए पर देकर लाभ कमा रहा है, जबकि उनके रखरखाव और संरक्षण की अनदेखी की जा रही है। समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे न केवल धार्मिक आस्था आहत होती है, बल्कि ऐतिहासिक विरासत भी खतरे में पड़ जाती है।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख़्वा प्रांत के एबटाबाद में स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे को कथित तौर पर 10 मिलियन (1 करोड़) पाकिस्तानी रुपये में बेच दिए जाने का मामला सामने आया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बिक्री ईटीपीबी के माध्यम से की गई बताई जा रही है। ईटीपीबी वह सरकारी संस्था है, जो पाकिस्तान में सिख, हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े गुरुद्वारों, मंदिरों और धार्मिक संपत्तियों के रखरखाव और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।
पाकिस्तानी सिख नेताओं ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए संबंधित ईटीपीबी अधिकारी की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की इमारतों को व्यावसायिक लाभ के लिए बेचना न केवल समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि देश की साझा विरासत के संरक्षण पर भी सवाल खड़े करता है।
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