हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का दिन बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खुद देवता पृथ्वी पर आते हैं और पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।
यही कारण है कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते है माना जाता है
इससे व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है।
कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिकी पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है।
शास्त्रों में इस दिन गंगा स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु देवी देवताओं का पूजन करते और मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं।
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है।
माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल मिलता है।
इस दिन नदियों एवं तीर्थों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, पापों का ना/श होता है।

कार्तिक पूर्णिमा तिथि शाम 06:48 बजे तक रहेगी
पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि 04 नवंबर 2025 को प्रात:काल 10:36 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 05 नवंबर 2025 को सायंकाल 06:48 बजे तक रहेगी
जानिए देव दीवाली क्यों मनाई जाती है?
शास्त्रो के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था।
इस विजय से सभी देवता बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने पृथ्वी पर आकर इस खुशी को मनाया था।
इसके साथ ही यह भी माना जाता है कि देवता इस दिन धरती लोक पर आते हैं
और गंगा घाटों पर दीप जलाते हैं और दीपावली मनाते हैं। देवताओं द्वारा मनाई गई इसी दीपावली को ‘देव दिवाली’ कहा जाता है।
वहीं, इस दिन गंगा मैया की भव्य आरती का भी विधान है।
विष्णु के भक्तों के लिए यह दिन इसलिए खास है क्योंकि भगवान विष्णु का पहला अवतार इसी दिन हुआ था।
प्रथम अवतार में भगवान विष्णु मत्स्य यानी मछली के रूप में थे। इससे सृष्टि का निर्माण कार्य फिर से आसान हुआ।
श्री सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करना चाहिए
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद भगवान श्री सत्यनारायण के व्रत की कथा अवश्य ही सुननी चाहिए।
कहा जाता है इससे उनकी कृपा बनी रहती है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान श्री हरि की गंध, अक्षत, पीले लाल पुष्प, नारियल, पान, सुपारी, कलावा, तुलसी, आंवला, दूर्वा, शमी पत्र, पीपल के पत्तों एवं गंगाजल से पूजन करने से व्यक्ति को जीवन में किसी भी वस्तु का अभाव नहीं रहता है।
दीपदान का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रत्येक मनुष्य को दीपदान अनिवार्य रूप से करना चाहिए ।
स्कन्द पुराण में ब्रह्मा जी ने नारद जी को कार्तिक मास में दीपदान की महिमा के बारे में विस्तार से बताया है।
उनके अनुसार कार्तिक माह में दीपदान से राजसुय यज्ञ और अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।
उसमें भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान करने का पुण्य जन्म जन्मांतर तक अक्षय रहता है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी,प्रयागराज, हरिद्वार, पुष्कर में स्नान करने की भी पंरपरा है इस दिन बहुत लोग यहां स्नान करते है।
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